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कहानी उसकी, जिस पर ह’त्या-कि’डनैपिंग जैसे 31 केस, 5 साल बाद जेल से छूटकर दोबारा सांसद बना, तो बेस्ट परफॉर्मिंग एमपी बने, लव स्टोरी भी दिलचस्प है

“जिंदगी में नाम कमाने की ख्वाहिश बचपन से ही रही। नन्हा बालक रहा होउंगा, जब मैं मां को ये गाना सुनाता था- ‘माता मुझको बंदूक दे दो, मैं सरहद पर जाऊंगा…दुश्मन को मार भगाऊंगा।’ ये पंक्तियां मैंने कहां सीखीं, याद नहीं। लेकिन मां बताती हैं कि मैं काफी कम उम्र में ये गाना गाता था। नाम कमाने की ख्वाहिश से जुड़ी एक और बात है। जब मैं मां को कहा करता था कि ‘मां ये सर्किट हाउस में जो नेता लोग आए हैं, उन पर अगर बम फोड़ दूं तो मेरा नाम हो जाएगा।’ मां ने मेरी महत्वाकांक्षा को ध्यान में रखते हुए मैट्रिक परीक्षा के बाद एनडीए (नेशनल डिफेंस एकेडमी) की परीक्षा से

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