MUZAFFARPUR

वैलेंटाइन वीक में इश्क का गजब का इम्तिहान, शाम को भरा मांग, सुबह इस कारण किया शादी से इनकार…

बिहार : मोहब्बत के मौसम में जहां गुलाब, चॉकलेट और कसमों की बारिश होती है, वहीं बिहार में इश्क ने ऐसा यू-टर्न लिया कि पूरा इलाका तमाशबीन बन गया। वैलेंटाइन वीक में वादों की फेहरिस्त लंबी थी, मगर निभाने की बारी आई तो जनाब के हौसले ठंडे पड़ गए।

कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। नालंदा के नूरसराय थाना क्षेत्र के बाराखुर्द पंचायत के खरजमा गांव की एक युवती और खरजमा निवासी मुक्कू पासवान के पुत्र राहुल पासवान के बीच करीब तीन साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। डेढ़ साल पहले दोनों ने अपनी मर्जी से शादी भी रचा ली थी, लेकिन पारिवारिक पॉलिटिक्स के चलते राहें जुदा हो गईं। इश्क का कनेक्शन फिर भी बरकरार रहा कॉल, चैट और मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा।

फिर आया वैलेंटाइन वीक। बुधवार की रात युवक साहब अचानक प्रेमिका के दरवाजे पर दस्तक देते हैं। बताया जाता है कि परिजनों और मोहल्लेवालों के सामने ही युवती की मांग में सिंदूर भर दिया ऐलान-ए-मोहब्बत भी, निकाह-ए-इरादा भी! रातभर वही ठहरे रहे। गांव में फुसफुसाहटें, कानाफूसी  का दौर शुरू हो गया “वाह रे इश्क !”

लेकिन सुबह की धूप ने रात की कसमें फीकी कर दीं। जैसे ही यह खबर युवक के घर पहुंची, वहां इंकलाब आ गया। गुरुवार को युवक दुल्हन को लेकर अपने घर तो पहुंचा, मगर घर की चौखट पर ही हिम्मत जवाब दे गई। इल्ज़ाम है कि परिजनों ने साफ इनकार कर दिया ये रिश्ता मंज़ूर नहीं!” नतीजा? दुल्हन पूरी रात ससुराल के दरवाज़े पर बैठी रही। मोहब्बत की माला गले में थी, मगर ठिकाना नहीं।

शुक्रवार को मामला सुलग उठा। युवती के परिजन ग्रामीणों के साथ खरजमा पहुंचे। दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई। हालात बिगड़ते देख पंचायत बुलाई गई। गांव के गणमान्य लोग, मुखिया, सरपंच और जिला परिषद पति सत्येंद्र मुकुट मौजूद रहे। लंबी बहस के बाद फैसला टल गया कहा गया कि युवती के पिता जो चेन्नई में हैं और युवक के दादा जो बक्सर में रहते हैं, उनकी मौजूदगी में 20 फरवरी को अगली पंचायत होगी। फिलहाल दुल्हन मायके लौट गई है और इश्क़ अदालत-ए-पंचायत में पेशी का इंतजार कर रहा है। थानाध्यक्ष ने भी साफ़ कर दिया कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, शिकायत आई तो कार्रवाई होगी।वैलेंटाइन वीक में ये ‘लव स्टोरी’ एक सवाल छोड़ गई क्या मोहब्बत सिर्फ सिंदूर भरने तक है, या उसके बाद जिम्मेदारी निभाने का भी कोई वादा होता है?

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