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Muzaffarpur / हर दुकान से लिया जाएगा सैंपल:काजू बर्फी में मिलाए सभी पदार्थों की अब लैब से मांगी जाएगी अलग-अलग रिपोर्ट

मिठाई व अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट रोकने को लेकर 14 सदस्यीय जिलास्तरीय परामर्शदात्री समिति की बैठक हुई। इसमें डीएम प्रणव कुमार ने फूड सेफ्टी अफसर सुदामा चौधरी से पूछा कि जितनी मात्रा में जिले में काजू की बर्फी बिकती है, उतनी मात्रा में काजू कहां फलता है। डीएम का सवाल था कि दुकानदार काजू बर्फी के नाम पर मिलावट कर रहे हैं। लेकिन फूड सेफ्टी अफसर ने डीएम के सवाल का उल्टा ही जबाव दे दिया। बताया कि काजू बर्फी में अल्युमिनियम का अर्क रहता है।

इस पर डीएम भड़क गए और अभियान चलाकर मिठाई दुकानों से काजू बर्फी का नमूना लेकर जांच कराने का निर्देश दिया। इस दौरान डीएम ने अबतक की रिपोर्ट के बारे में जब जानकारी ली ताे पता चला कि लैब से जाे रिपोर्ट आती है, उसमें सिर्फ मिस स्टैंडर्ड या मिस ब्रांड की रिपोर्ट आती है। इस पर डीएम ने सिविल सर्जन से कहा कि जाे भी सैंपल भेजा जाएगा, उसमें ये पता करें कि किस सामग्री की कितनी मात्रा है और उसे खाने से क्या हानि-लाभ हाे सकता है।

जवाब के बाद डीएम की सख्ती : शहर से देहात तक सरेआम मिलावटी सामान बिकने पर लगेगी राेक

मिलावट राेकने को 3 वर्ष बाद परामर्शदात्री समिति की बैठक

खाद्य सुरक्षा कानून बनने के बाद जिला स्तर पर मिलावट राेकने के लिए गठित 14 सदस्यीय परामर्शदात्री समिति की 3 वर्ष बाद पहली बार 11 मार्च काे हुई। इसमें खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार व समस्याओं के निदान और मिलावट राेकने को लेकर सदस्याें ने सुझाव दिए। अब प्रत्येक तीन माह पर यह बैठक हाेगी। परामर्शदात्री समिति के अस्तित्व में आने से शहर से लेकर ग्रामीण बाजाराें तक सरेआम मिलावटी सामान बिकने पर राेक लग सकती है।

जिलास्तरीय परामर्शदात्री समिति के प्रमुख कार्य

  • खाद्य संरक्षा कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए मूल्यांकन अनुश्रवण और सलाह देना।
  • जिला स्तर पर मिलावट व अन्य शिकायताें की निबटारे के लिए आवश्यक कदम उठाना और टोल फ्री नंबर की व्यवस्था करना।
  • मध्याह्न भाेजन याेजना, आंगनबाड़ी और अन्य सुरक्षा से संबंधित कार्यक्रमों में फोर्टिफाइड फूड का उपयाेग सुनिश्चित कराना।
  • दूध व दूध से उत्पादित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता काे सुनिश्चित करने के लिए लगातार माॅनिटरिंग करना।
  • दूषित खाद्य पदार्थों के खाने से हाेने वाली बीमारियाें से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाना।
  • खाद्य संरक्षा अधिकारी व अभिहित अधिकारी के कार्याें की समीक्षा।
  • पेय व खाद्य पदार्थों में मिलावट राेकने के लिए विशेष कदम उठाना।

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