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छात्रों की कलाकारी मंत्रमुग्ध कर देने वाली:25 जनवरी को मनाया जाएगा पटना कला एवं शिल्प महाविद्यालय का 84वां स्थापना दिवस

बिहार के इकलौते पटना कला एवं शिल्प महाविद्यालय का 84वां स्थापना दिवस 25 जनवरी को मनाया जाएगा। इसको लेकर कॉलेज परिसर में तैयारियां चल रही है। ज्ञातव्य है कि पटना विश्वविद्यालय में कला एवं शिल्प महाविद्यालय का स्थापना दिवस बेहद आकर्षक एवं रंगों से परिपूर्ण हुआ करता है।n

विद्यार्थी और कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत करेंगें। साथ ही कॉलेज कैंपस में चारों ओर तरह-तरह की प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है। हर साल की तरह इस साल भी कॉलेज के अलग-अलग विभागों द्वारा छात्र/छात्राएं रंग बिरंगी कलाकृतियां बनाकर प्रस्तुत करेंगे।

इस कॉलेज ने देश को कई बेहतरीन शिल्पकार दिए हैं। कला और शिल्प महाविद्यालय की स्थापना 25 जनवरी, 1939 को स्वर्गीय राधा मोहन द्वारा गोविंद मित्रा रोड पर की गई थी। बाद में, 1949 में, बिहार सरकार ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया और इसका नाम बदलकर गवर्नमेंट स्कूल ऑफ़ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स कर दिया। 1957 में, कॉलेज विद्यापति मार्ग में अपने वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित हो गया। संस्थान का नाम बदलकर 12 अप्रैल, 1977 को कला और शिल्प महाविद्यालय कर दिया गया और इसे पटना विश्वविद्यालय का एक घटक महाविद्यालय बना दिया गया।

कोरोना काल के बाद इस बार स्थापना दिवस बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाएगा। कॉलेज परिसर में बच्चे लगातार दिन रात मेहनत कर रहे है। छात्रों द्वारा दीवारों पर एक से बढ़कर एक अद्भुत पेंटिंग बनाई जा रही है जिसको देखकर कोई भी मंत्रमुग्ध हो जाएगा। इसके साथ ही लड़के और लड़कियां अपने हाथों से पत्थरों को तोड़कर विभिन्न आकृतियों का रूप दे रहे हैं। जिस मेहनत और लगन से यहां के बच्चे कलाकारी कर रहे हैं उनके इस प्रतिभा को देख कर कोई भी दंग रह जाएगा।

वहीं इस कॉलेज के अंतिम वर्ष का छात्र दीपू अलग तरह के प्रतिभा दिखा रहा है। दीपू ने आयरन से एक बहुत ही सुंदर स्टैच्यू बनाई है, जिसका कांसेप्ट दिल को छू देने वाला है। इस स्टेचू में एक तरफ दिखाया गया है की किस प्रकार बच्चे बड़े होकर कमाने के लिए माता-पिता से दूर चले जाते हैं जिसके बाद बूढ़ा बाप अपने बेटे का जिंदगी भर दरवाजा खोलकर इंतजार करते रहता है। बूढ़ा बाप सोचता है कि बेटा एक न एक दिन जरूर आएगा। वही स्टैचू के दूसरी तरफ दरवाजा बंद है जिसको देखकर यह समझा जा सकता है कि वह लौटकर नहीं आएगा। स्टेचू के ऊपर की तरफ आयरन से एक वृक्ष बनाया गया है इसका अर्थ है कि बेटा अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहा है।

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