एईएस से बचाव के लिए एक्सपर्ट कमेटी की 18 जनवरी को बैठक के अगले ही दिन इस सीजन का पहला एईएस मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। हालांकि, माेतिहारी के जिस बच्चे में एईएस की पुष्टि हुई है, वह एसकेएमसीएच में इलाज के बाद स्वस्थ हो गया। इसके बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। अब उसके बाेनमैराे का सैंपल पुणे भेजा जाएगा। वहां से रिपाेर्ट आने पर यह देखा जाएगा कि हाड़ कंपाने वाली इस ठंड में भी एईएस के मरीज मिलने का क्या कारण है।
एसकेएमसीएच के शिशु राेग विभागाध्यक्ष डाॅ. गाेपालशंकर सहनी का कहना है कि पिछले दाे सालाें से एईएस का ट्रेंड बदल रहा है। 2022 के जनवरी और दिसंबर में भी एक-मरीज मिला था। अब इस साल 2023 के जनवरी में भी सीजन का पहला मरीज मिला है। एईएस का अब तक का जाे ट्रेंड रहा है, उसमें हर चाैथे साल में अधिक केस आता रहा है। इस साल चाैथा साल है। ऐसे में इस वर्ष अधिक बच्चाें काे एईएस से पीड़ित हाेने की आशंका जताई जा रही है।
जागरूक रहने की जरूरत
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी सह अपर निदेशक डाॅ. विनय कुमार शर्मा ने कहा कि चाैथे साल हाेने के कारण इस वर्ष अधिक बच्चे पीड़ित हाे सकते हैं। अब तक एईएस से बचाव के लिए बच्चाें काे धूप में नहीं निकलने देना, कच्ची लीची नहीं खाने देना और अधिक गर्मी व उमस के कारण बीमारी माना जाता रहा है। लेकिन ठंडी में भी एईएस मिलना काफी चिंताजनक है। डाॅ. शर्मा ने बताया कि चूंकि बीमारी के कारणाें का अब तक काेई ठाेस कारण पता नहीं है, इसलिए प्रीकाॅशन और जागरूकता ही बचाव है।



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