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गया जेल में बंदी की मौत बना रहस्य:बड़ा सवाल- 18 या 19 दिसंबर की शाम गई जान, परिजन लगा रहे न्याय की गुहार

बीते दो महीने से जेल में बंद चल रहे 21 वर्षीय युवक की अचानक तबीयत बिगड़ने के साथ अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो जाने की कहानी मृतक के परिजनों और उसके गांव वालों के गले नहीं उतर रहा है। परिजन न्याय की गुहार लगा रहे। खास बात यह भी कि न ही जेल प्रशासन ही क्लियर कर रहा है कि आखिर उसे हुआ क्या था। वह मुकेश की मौत के समय को लेकर खुद असमंजस में है। प

जेल अधीक्षक विजय अरोड़ा के मुताबिक जेल में बंद चल रहे बंदी की तबीयत बीते दिनों खराब थी। उसे सर्दी खांसी और बुखार हो रहा था जिसका इलाज चल रहा था। वह स्वस्थ भी था। 17 दिसंबर को उसने स्नान भी किया था। लेकिन 18 दिसंबर रविवार की शाम अचानक से उसकी तबीयत बिगड़ी तो जेल अस्पताल की नसीहत पर उसे एमएमसीएच ले जाया गया लेकिन मुकेश ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। यही वजह रही कि एमएमसीएच के डॉक्टर ने मुकेश को ब्राड डेड घोषित कर दिया। यह कहना है जेल अधीक्षक का।

जेल प्रशासन की ओर से एसडीएम सदर को लिखी गई चिठ्‌ठी को भी जरा पढ़िए

एसडीएम सदर को जेल प्रशासन 19 दिसंबर की सुबह पत्र लिख कर पोस्टमार्टम के लिए मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जाने की मांग करता है। जेल प्रशासन की ओर से चिट्‌ठी में लिखा गया है कि मुकेश, 20 सितंबर को जेल में आया था। 18 दिसंबर को मुकेश अर्द्ध चेतन हो गया। उसे उसी स्थिति में कारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। बंदी मुकेश का एसपीओ 2 कम और फलक्च्यूट होने और ओ 2 इनहीलेशन के बाद भी तबीयत में सुधार नहीं होने की स्थिति में प्राण रक्षार्थ कारा चिकित्सक की अनुशंसा पर एमएमसीएच ले जाया गया। उसे ओपीडी में दिखाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे शाम 7:20 ब्राड डेड घोषित किया। यह तो हुई सदर एसडीएम को जेल प्रशासन की ओर से भेजी गई चिट्‌ठी की बात।

जेल प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों को दी गई चिट्‌ठी का भी मजमून जान लीजिए

परिजन को दिए गए पत्र में कहा गया है कि मुकेश की मृत्यु हो गई है। उसकी मृत्यु शाम 7:30 बजे 19 दिसंबर को हुई है। साथ ही में यह भी लिखा गया है कि शीघ्र एमएमसीएच पहुंच कर शव प्राप्त कर लें नहीं तो सरकारी प्रावधान के तहत दाह संस्कार कर दिया जाएगा। अब सवाल यह उठता हैै कि जेल प्रशासन की ओर से भेजी गई चिट्‌ठी में मौत का जो समय दिखाया गया है उस समय से कुछ घंटा पहले ही मृतक के परिजन मृतक मुकेश का शव डीएम के दफ्तर के गेट पर रख कर प्रदर्शन कर रहे थे। दो अलग-अलग चिट्‌ठी में जेल प्रशासन की ओर से दो तरह के समय का उल्लेख किए जाने के सवाल के जवाब में जेल सुपरिटेंडेंट का कहना है कि मौत तो 18 की शाम ही हुई है। चिट्‌ठी में कैसे गलत लिखा गया है। इसकी पड़ताल करेंगे।

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