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आपस में चंदा कर लोग कराते सफाई:लक्ष्मीनारायण नगर बेला लेन- 2 में कूड़े का अंबार, घरों में घुस जाते हैं सांप-बिच्छू

बेला राेड स्थित लक्ष्मीनारायण नगर में मेन राेड से सटी लेन 2 के लाेग आपस में चंदा कर माेहल्ले की साफ-सफाई कराते हैं, क्याेंकि यहां लंबे समय से कूड़े का भी उठाव नहीं हाेता। यहीं नहीं पूरे माेहल्ले के प्रवेश द्वार से लेकर अंतिम छाेर तक सड़क किनारे झाड़ी व गंदगी का फैलाव इस कदर है कि आए दिन सांप-बिच्छू लाेगाें के घराें में घुसते जाते हैं।

ये लाेग बार-बार प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक काे स्थिति से अवगत करा चुके हैं, मगर निदान नहीं हुआ। लाेगाें का कहना है कि माेहल्ला मेन राेड पर है। इससे हाेकर बेला औद्याेगिक क्षेत्र, रामकृष्ण मिशन आश्रम, माॅल समेत बेला की ओर प्रतिदिन हजाराें लाेगाें का आना-जाना हाेता है, फिर भी इस राेड की उपेक्षा हाे रही है।

हवा चलने पर उड़ती ऐसी धूल कि घर से निकलना हाेता मुश्किल
प्रांजल का कहना है कि न कभी कूड़े का उठाव हाेता है, न ही माेहल्ले में झाड़ू लगती है। ईंट साेलिंग वाली सड़क पर झाड़ियां व किनारे में कचरे का ढेर। हवा चलने पर इतनी धूल उड़ती है कि घर से निकलना मुश्किल हाेता है। नाक पर रुमाल रखे बगैर आ-जा नहीं सकते। माेहल्ले में प्रबुद्धजन रहते, पर काेई देखनेवाला नहीं है।

गंदगी के कारण फैलती है बदबू, इससे भी मोहल्ले के लोग रहते परेशान
लक्ष्मीनारायण नगर मेन राेड से सटी लेन 2 के काैशल किशाेर कहते हैं कि प्रशासनिक स्तर पर साफ-सफाई कराने का काफी प्रयास किया गया, मगर काेई फायदा नहीं हुआ। गंदगी के कारण घराें में सांप-बिच्छू घुस जाते हैं। बदबू से काफी परेशानी हाेती है। ऐसे में आपस में 4-5 साै रुपए जुटाकर मजदूराें से सफाई कराई जाती है।

मोहल्ले में नगर निगम का ताे काेई कर्मी भी कभी नहीं आता
निलय केशव कहते हैं कि कभी भी माेहल्ले में नगर निगम का काेई कर्मचारी हाल जानने नहीं अाता। अगर खुद से सफाई नहीं कराई जाए ताे रहना दूभर हाे जाएगा। एक ताे छाेटी सी नाली है वाे भी कचरा भरने से बंद हाे जाती है। मेन गेट पर ही गंदगी का ढेर लगा रहता है। लेकिन, जनप्रतिनिधियाें का भी इस पर काेई ध्यान नहीं है।

जनप्रतिनिधि ताे वाेट मांगने के लिए ही इस कॉलोनी में आते हैं
निशा किशाेर का कहना है कि जनप्रतिनिधि यहां सिर्फ चुनाव के समय वाेट मांगने आते हैं। जबकि, गंदगी व बदबू के कारण स्थिति यह है कि घर के दरवाजे पर बैठना भी मुश्किल है। जहरीले कीड़े-मकाेड़ाें से डर लगा रहता है पतली नाली पर बड़े-बड़े घास उगे रहते हैं। कई वर्षाें से माेहल्लेवासी चंदा कर साफ-सफाई कराते हैं।

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