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12 घंटे की रेड…फ्लैट से मिले 1.8 करोड़ कैश:पटना में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीत को भेजा जेल; प्रॉपर्टी के पेपर भी मिले

पटना में भवन निर्माण विभाग के सेंट्रल डिवीजन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीत कुमार के फ्लैट से 1.8 करोड़ कैश मिले हैं। 12 घंटे की रेड में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम को कई प्रॉपर्टी के पेपर भी मिले हैं। जिसे टीम ने जब्त कर लिया है। अब हर एक पेपर की जांच होगी। उसके आधार पर प्रॉपर्टी को भी वेरिफाई किया जाएगा। लेकिन, जांच का यह काम रविवार के बाद होगा।

मुख्यालय के मुताबिक अलग-अलग जगहों पर इंवेस्टमेंट के पेपर जब्त किए गए हैं। इनमें अधिकांश प्रॉपर्टी से रिलेटेड हैं। दूसरी तरफ सूत्र बताते हैं कि निगरानी की टीम गिरफ्तार किए गए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के कार्यकाल की भी पड़ताल करेगी। क्योंकि, अब तक की जांच में संजीत कुमार के द्वारा सरकारी पद का दुरुपयोग करने और बगैर रिश्वत लिए ठेकेदारों के बिल का भुगतान नहीं करने की कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं। जिनकी अब गहराई के साथ पड़ताल होगी।

1.8 करोड़ से अधिक मिला कैश, गर्दनीबाग के हरेंद्र विला में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर का फ्लैट

छापेमारी के दौरान इनके फ्लैट से कुल 1 करोड़ 8 लाख 50 हजार रुपया कैश बरामद हुआ है। जिसे निगरानी की टीम ने जब्त कर लिया। इन रुपयों को अलग-अलग बैग में करके आलमीरा और बेड के नीचे छिपा कर रखा गया था। जब्त कैश में 2 हजार, 500 और 200 रुपए के नोटों की गड्‌डी थी। इन नोटों को गिनने के लिए निगरानी की टीम को कैश काउटिंग मशीन मंगवानी पड़ी थी। इसके अलावा फ्लैट से ही कुल 27 लाख रुपए की सोने-चांदी की ज्वेलरी जब्त की गई।

12 घंटे तक चली कार्रवाई

निगरानी टीम के अनुसार उनकी यह कार्रवाई करीब 12 घंटे तक चली। शुक्रवार की शाम एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीत कुमार को 2 लाख रुपए का रिश्वत लेते हुए उनके ही फ्लैट से निगरानी की टीम ने पकड़ा था। इसके बाद से ही उनके फ्लैट को खंगालना शुरू कर दिया गया। साथ ही निगरानी की दूसरी टीम को पटना से बक्सर भेज दिया गया था।

वहां संजीत कुमार का पुश्तैनी घर है। हालांकि, बक्सर में घर से कुछ हाथ नहीं लगा। लेकिन, पटना में निगरानी की कार्रवाई जारी रही। शाम से देर रात हुई और फिर सुबह भी हो गई। टीम के अनुसार शनिवार की सुबह 5 बजे के करीब उनकी कार्रवाई पूरी हुई। शुरुआती पूछताछ के बाद पकड़े गए रिश्वत लेने वाले एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को कोर्ट में पेश किया गया और फिर वहां से ज्यूडिशियल कस्टडी में जेल भेज दिया गया। हालांकि, इस मामले में निगरानी टीम की जांच आगे भी जारी रहेगी।

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