2016 में नगर निगम तत्कालीन नगर परिषद सासाराम में 25 करोड़ के वाहन खरीद में तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार की भूमिका की जांच होगी। इस संबंध में नगर विकास विभाग के सचिव ने आदेश जारी कर दिया है। ज्ञात हो कि नगर परिषद द्वारा 2016 में हुक लोडर 1, कंपैकटर 1, डिसेल्टिंग मशीन 1 एवं डम्प टैंक 3 के लिए सुप्रीम इंटरप्राइजेज नामक कंपनी से डील हुई थी
इस संबंध में वर्क ऑर्डर 21 मार्च 2016 को जारी किया गया था। इन सभी वाहनों का मूल्य ढाई करोड़ था। वर्क आर्डर निकलने के बाद एजेंसी ने उक्त गाड़ियों की जगह सिर्फ चेसिस भेज दी गई थी। जिसमें से हुक लोडर को कंप्लीट करने के लिए जून 2016 में राजस्थान भेजा गया है अन्य गाड़ियों को कंपलीट करने के लिए कंपनी में भेजा जाएगा। लेकिन राजस्थान भेजी गई गाड़ी आज तक कंप्लीट होकर नहीं लौटी ना ही अन्य गाड़ियों को कंप्लीट करने के लिए भेजा गया।
6 साल से खड़ी है गाड़ियां
बड़ी बात यह है कि नगर निगम में मंगाई गई गाड़ियों की चेसिस आज जक कंप्लीट नहीं हुई। नगर निगम परिसर में खड़े ये चेसिस किसी काम में नहीं लिए गए। जिससे ये खड़े-खड़े खटारा बन रहे हैं।
लोक शिकायत निवारण में गया मामला
मामले में नगर निगम के पूर्व पार्षद अतेंद्र सिंह ने लोक शिकायत निवारण में परिवाद दायर किया था। इसके द्वितीय अपील पर दो दिन पूर्व 25 नवंबर को परिवाद की सुनवाई करते हुए प्रधान सचिव ने वाहनों की खरीद और अब तक की कार्रवाई में तत्कालीन कार्यपालक अधिकारी मनीष कुमार की भूमिका के जांच के आदेश दिए हैं। द्वितीय अपील में सुनवाई के दौरान उपस्थित नगर निगम के आयुक्त सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि प्रधान सचिव के आदेश के आलोक जांच कराई जाएगी। अभी आदेश की लिखित प्रति प्राप्त नहीं हुई है।



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