मोकामा और गोपालगंज विधानसभा का उपचुनाव हो चुका है। अब बारी मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उप चुनाव की है। जो 5 दिसंबर को होगा। इस सीट पर भी NDA की तरफ पहले भाजपा के उम्मीदवार उतारे जाने की बात सामने आई। पर सूत्रों के हवाले से अब एक बड़ी बात सामने आ रही है। संभावना है कि आने वाले दिनों में कुढ़नी विधानसभा की सीट चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) के खाते में जा सकती है। इसके लिए अंदरूनी तौर पर दोनों पार्टियों के बीच बातचीत चल रही है। चिराग पासवान की पार्टी के कुछ नेता भी दबी जुबां में इस बात पर हामी भर रहे हैं।
शुक्रवार को हुई बातचीत
सूत्र बताते हैं कि यह बातचीत अभी शुरुआती दौर में है। शुक्रवार को चिराग पासवान और भाजपा के केंद्रीय स्तर के बड़े नेता के बीच इस संबंध में बातचीत भी हुई है। गोपलगंज की सीट भाजपा जीत चुकी है। जबकि, मोकामा में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इन दोनों ही जगहों पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भाजपा उम्मीदवार का समर्थन किया था। खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जमुई सांसद चिराग पासवान ने दोनों विधानसभा क्षेत्रों में जाकर चुनाव प्रचार किया था।
रिजल्ट आने के बाद कहा गया कि दोनों ही जगहों पर भाजपा को वोट बढ़ा। चिराग पासवान की वजह से पासवान व दलित वोटर्स ने भाजपा के पक्ष में अपना वोट दिया। इस वजह से चिराग पासवान की अहमियत भाजपा की नजर में और बढ़ गई है।
उम्मीदवार के तौर पर तय हुए कुछ नाम
शुरुआती दौर की बातचीत होने के बाद शुक्रवार की शाम में ही चिराग पासवान ने अपनी पार्टी के प्रदेश के बड़े नेताओं के साथ एक मीटिंग की। कुढ़नी विधानसभा सीट को लेकर कई महत्वपूर्ण प्वाइंट पर बातें हुई। कुढ़नी के सभी पंचायतों और प्रखंड स्तर पर एक लिस्ट मंगाई गई है। प्रदेश इकाई की तरफ से उम्मीदवार के तौर पर कुछ नाम भी चिराग पासवान के सामने रखा गया है।
1570 वोट से लोजपा उम्मीदवार की हुई थी हार
बात 2010 के विधानसभा चुनाव की है। उस वक्त कुढ़नी विधानसभा सीट से लोजपा ने बिजेंद्र यादव को अपना उम्मीदवार बनाया था। उस चुनाव में जदयू उम्मीदवार मनोज कुमार सिंह से सीधी टक्कर हुई थी। भले ही लोजपा उम्मीदवार उस वक्त चुनाव हार गए थे। पर जदयू को वहां कड़ी टक्कर मिली थी। दोनों पार्टियों के बीच महज 1 प्रतिशत वोट का अंतर था। जदयू उम्मीदवार मनोज कुमार सिंह 1570 वोट की मार्जिन से चुनाव जीते थे।
जातीय आधार पर इस तरह है समीकरण –
पासवान – 10 से 12 हजार
सहनी – 28 से 30 हजार
कुशवाहा-कुर्मी – 30 से 32 हजार
वैश्य – 35 से 38 हजार
यादव – 30 से 35
मुसलमान – 35 से 38
भूमिहार – 41 से 45 हजार
राजपूत – 15 से 18 हजार
कायस्थ – 4 से 5 हजार
ब्राह्मण – 5 से 6 हजार



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