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चंडीगढ़ की ‘डिलीवरी गर्ल’ विद्या बनी मिसाल:एक्सीडेंट के बाद 11 साल बैड पर रही; फिर हिम्मत जागी; नेश्नल स्तर पर खेली

जिंदगी में कुछ लोग स्वस्थ होने पर भी नाकामयाबी के लिए किस्मत को कोसते हैं। ऐसे लाखों-करोड़ों लोगों के लिए चंडीगढ़ की ‘डिलीवरी गर्ल’ विद्या एक मिसाल है। बिहार के समस्तीपुर जिले के छोटे से गांव की विद्या का सड़क हादसे के बाद आधा शरीर अपंग हो गया था। 11 साल वह बैड रिडन रही। फिर हिम्मत जागी और राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबॉल और टेबल टेनिस खेली।

विद्या ने स्कूबा डाइविंग की। स्विमिंग भी की और एरियल योग सीखा एवं अब सिखाती भी है। फिलहाल वह अपनी गुज़र-बहस के लिए Swiggy के लिए डिलीवरी गर्ल के रुप में काम कर रही है।

विद्या कहती हैं कि उनका कमर से नीचे का भाग काम नहीं करता। इसमें कुछ भी महसूस नहीं होता। ऐसे में शरीर के इस हिस्से का ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है। पिछले दो सप्ताह से वह शहर में फूड डिलीवरी कर रही है। विद्या ने बताया कि वह चंडीगढ़ से नहीं हैं। इसके बावजूद वह शहर की सड़कों पर गूगल मैप का सहारा लेकर फूड डिलीवरी की इस जॉब से जुड़ी हुई हैं।

2007 में हुई थी हादसे का शिकार

वर्ष 2007 में वह साइकिल चला रही थी। इसी दौरान पुल पर उनकी साइकिल अनियंत्रित हो गई और वह नीचे गिर गई। इस हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी और कमर के नीचे का हिस्सा अपंग हो गया। उसके बाद से वह बैड पर ही रहने लगी। माता-पिता ने अपने सामर्थ्य के हिसाब से उनका इलाज करवाया। हालांकि किसी भी डॉक्टर ने यह नहीं कहा कि वह जिंदगी में दोबारा चल पाएंगी। वह बिस्तर पर ही पड़ी रही। लगभग 11 सालों तक वह बिस्तर पर ही पड़ी रही।

रेस्टोरेंट से खाने का आर्डर पैक करवाती विद्या।

रेस्टोरेंट से खाने का आर्डर पैक करवाती विद्या।

लोगों के ताने भी सुने

विद्या कहती हैं कि उनकी हालत देख लोग कहते थे कि बेटी तो पराया धन होती है। अब यह सारी उम्र बोझ बन कर रहेगी। वहीं कुछ लोग कहते थे कि इसे ज़हर दे दो, मर जाएगी तो अच्छा है। विद्या कहती हैं कि इन बातों को सुन कर वह और ज्यादा तनाव में जाने लगी। परिवार में भी तंगहाली और उसकी इस स्थिति को लेकर मां-बाप परेशान रहते थे। ऐसे में वह भगवान को कहती थी कि या तो उसे मौत दे दे या उसके लिए कुछ कर दे।

अल्सर भी हो गए थे, अभी भी ख्याल रखना पड़ता है

विद्या बताती हैं कि लंबे समय तक बैड पर रहने के चलते उन्हें बैडसोरस (प्रेशर अल्सर) भी हो गए थे। इसके बाद उनकी सहायता के लिए कोई संस्था आगे आई और उनका बैडसोरस का ऑपरेशन हुआ और सेहतमंद किया। उन्होंने कहा कि बैडसोरस की दिक्कत की संभावना बनी रहती है। ऐसे में वह लंबे समय तक नहीं बैठ पाती और एक्सरसाइज भी करनी पड़ती है।

राष्ट्रीय स्तर पर यह सब किया

विद्या ने दिव्यांग श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर बॉस्केटबॉल खेली। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर टेबल टेनिस भी खेलती हैं। इसके अलावा स्कूबा डाइविंग भी की हुई है। स्विमिंग भी करती हैं। एरियल योग भी किया है। वहीं सेंटर में योग सिखाती भी हैं। वहीं फैशन शो भी किया। विद्या ने बताया कि अब उसके आत्मनिर्भर बनने और जॉब लगने पर माता-पिता बेहद खुश हैं। 11 सालों तक उन्होंने बहुत सेवा की और लोगों के ताने भी सहे।

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