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पहली बार एमआईटी की टीम एक ही वर्ष में दो:कोयला खदान में श्रमिकों की जान बचाने वाली डिवाइस बना कर जीती

मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) की टीम ने स्मार्ट इंडिया हैकथाॅन 2022 के हार्डवेयर एडिशन में भी विजेता बन गई है। ऐसा पहला मौका है जब कॉलेज की टीम एक ही वर्ष में दो बार राष्ट्रीय स्तर पर विजेता बनी है। इससे पहले टीम ने सॉफ्टवेयर एडिशन में विजेता बनने का गौरव हासिल किया था। कुल मिलाकर कॉलेज ने राष्ट्रीय स्तर पर यह चौथा खिताब जीता है।

गाजियाबाद में आयोजित स्मार्ट इंडिया ग्रैंड फिनाले में टीम ने यह उपलब्धि हासिल की है। कॉलेज की सृजन 2.0 नामक टीम ने स्मार्ट डिवाइस बनाई है। खनन उद्योग से जुड़े मजदूर हो या जमीन की गहराई में काम करने श्रमिक, गहरे नाले की सफाई के लिए उतरे सफाईकर्मी। अब किसी की जान ऑक्सीजन की कमी होने, दम घुटने से लेकर हृदय गति रूकने या आग लगने से नहीं होगी।

स्मार्ट डिवाइस किसी भी तरह के जानलेवा खतरों के बारे में पहले ही अलर्ट कर देगा। सबसे खासियत यह स्मार्ट डिवाइस बगैर इंटरनेट काम करता है। इसे बेल्ट और मजदूर के हेलमेट में फिट किया जाएगा। कोल इंडिया की ओर से दिए गए प्रॉब्लम स्टेटमेंट के आधार पर इस डिवाइस को तैयार किया गया था। टीम के मेंटर प्रो. आशीष, प्रो. मोहित, टेक्नोलॉजी मैनेजर उत्पल कांत हैं।

सेंसर आधारित स्मार्ट डिवाइस मजदूर के हेलमेट और बेल्ट में होगी फिट, बगैर इंटरनेट ही होगी संचालित

हेलमेट – मजदूर का पल्स रेट रीड करेगा। वहीं अगर मजदूर के सिर या इसके आसपास कोई भारी वस्तु जैसे मिट्टी, ईंट, पत्थर या अन्य गिरेगा तो इसकी जानकारी आसानी से हासिल कर लेगा। बेल्ट में लगा डिवाइस – आग लगना या अन्य किसी वजह से तापमान बढ़ना फ्लेस सेंसर पता करेगा। वहीं कोई दमघोंटू गैस या ऑक्सीजन की मात्रा कम हाेने पर इसकी जानकारी देगा।

खनन में अत्यधिक जोखिम, इसलिए मजदूरों की ट्रेनिंग को बनेगा मॉडल

खनन उद्योग दुनिया भर में अत्यधिक जोखिम के लिए जाना जाता है। ऐसे में अब तक के शोध से इस बात की जानकारी मिली है कि अधिकांश घटनाएं मानवीय भूल के कारण होती है। भारत 2021 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश है। एक्सपर्ट डॉ आशीष ने बताया कि कोल इंडिया लि. की ओर से बताया गया कि कोयला खनन से जुड़े क्षेत्रों में वीआर (वर्चुअल रिएलिटी) तकनीक के कई फायदे हैं। खनिकों के प्रशिक्षण को क्लाउड आधारित वीआर प्रणाली बननी है। इससे कोयल खनन हादसों से श्रमिकों की जान काफी हद तक बचाई जा सकती है।

इन छह स्टूडेंट्स की टीम ने बनाई डिवाइस

विद्यासागर – ईसीई ब्रांच, रोहित कुमार – मेकेनिकल, शुभम कुमार – लेदर टेक्नोलॉजी, प्रिंस मौर्या – मेकैनिकल, ईशा कुमारी – मेकेनिकल, सत्येंद्र चौरसिया – इलेक्ट्रिकल।

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