नवादा में अब तक बारिश की बेरुखी से जिले के किसान परेशान हैं। खरीफ के पटवन की नौबत आ गयी है, ऐसे में जिले के नलकूपों पर जगी उम्मीदों ने भी धोखा देना शुरू कर दिया है। जिले में कुल 193 नलकूप हैं। इनमें से नौ शहरी क्षेत्र में हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल नहीं होता है। दुर्भाग्य यह है कि शेष बचे 184 नलकूपों में सिर्फ 72 नलकूप ही वर्तमान में कार्यरत हैं। इस प्रकार जिले के 112 नलकूप खराब पड़े हैं। खरीफ की मुख्य फसल धान के आच्छादन का कार्य बारिश के अभाव के कारण शुरू नहीं हो पा रहा है। अभी तक बारिश की जो स्थिति बनी हुई है, उसमें किसानों को नलकूप से पटवन की अत्यधिक जरूरत पड़ गई है, लेकिन स्थिति यह है कि कहीं तकनीकी त्रुटि, तो कहीं बिजली के अभाव को लेकर नलकूप बेकार पड़े रहने से किसानों को पटवन का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
नलकूप से पटवन की स्थिति बताती है कि एक नलकूप से औसतन 20 हेक्टेयर में खेतों का पटवन होता है। इस तरह से जिले के सभी 184 नलकूपों को यदि चालू करा दिया जाए, तो जिले में करीब 2680 हेक्टेयर खेतों को पानी मिलने लगेगा। आंकड़ों पर गौर करें तो खरीफ में औसतन 682.80 हेक्टेयर तक खेतों में पानी पहुंचाया गया। वहीं, गरमा में 141.76 हेक्टेयर खेत को पानी दिया गया, जबकि रबी सीजन में 519.70 हेक्टेयर खेतों तक पानी पहुंचाया गया है। विभाग की मानें तो एक पखवारे के अंदर ज्यादा से ज्यादा नलकूपों को चालू करा दिया जाएगा।मरम्मत के लिए मिले 2.29 करोड़ रुपये
लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता सर्वेश कुमार चौधरी कहते हैं कि जिले के खराब पड़े नलकूपों की मरम्मत की तैयारी शुरू कर दी गयी है। नलकूपों की मरम्मत का कार्य अब संबंधित पंचायतों के मुखिया के माध्यम से कराया जाना है।अभी खराब पड़े नलकूपों में से 50 की मरम्मत कराने के लिए विभाग को 2.29 करोड़ रुपये प्राप्त हो गए हैं। लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता सर्वेश कुमार चौधरी ने बताया कि जिले के सारे राजकीय नलकूपों को पंचायत में हस्तांतरित करा दिया गया है। अभी 72 नलकूप चालू हैं,



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