वर्ष 2019 की तरह ही वर्ष 2022 में मॉनसून की स्थिति है। वर्ष 2019 में 22 जून को मॉनसून की इंट्री हुई थी, पर अच्छी वर्षा नहीं हुई। इस साल मॉनसून समय से पूर्व बिहार में पहुंचा। औरंगाबाद में इसकी घोषणा 17 जून को ही हुई पर झमाझम बारिश अब तक नहीं हुई, कारण प्री-मॉनसून की एक्टिविटी न होना।
मौसम विज्ञान केन्द्र से मिले आंकड़े देखे तो वर्ष 2021 के जून माह में ही 260 एमएम वर्षा रिकॉर्ड की गई थी। लेकिन इस साल तो जून माह में अभी तक मात्र 16 एमएम ही बारिश हुई है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मानसून अभी तक रूठा हुआ है।
वर्ष 2021 में जून माह में चक्रवात और समय से पूर्व मॉनसून का आना था। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 244 मिलीमीटर वर्षा कम हुई है। वहीं वर्ष 2020 के अप्रैल, मई और जून माह में भी अच्छी बारिश हुई थी। मॉनसून से पूर्व इस एक्टिविटी का होना आवश्यक है, पर इस बार यह देखने को नहीं मिला। उन्होंने बताया कि सोमवार की रात से अगले तीन दिनों तक बारिश की संभावना है। बारिश का सिस्टम बन रहा है।
जिससे हवा में नमी आ गई है। अच्छी बारिश के आसार है। मौसम वैज्ञानिक की मानें तो अब मानसून के अनुकूल सिस्टम तैयार हो रहा है। जल्द ही बादल खूब बरसेंगे।मानसून आने के बाद इस माह में केवल दो दिनों ही तेज बारिश हो पाई है, इसके बाद कुछ नमी का माहौल जरूर बना था, लेकिन बाद की स्थिति चिंता में डाल दिया है। लोग आसमान की ओर ताक रहे हैं। लगातार गर्मी पडऩे के कारण जमीन का पानी सूख गया है। अब स्थिति यह है कि ऊपर सूरज कहर बरपा रहा है, तो दूसरी ओर जमीन के नीचे से उमस ने गर्मी और बढ़ा दी है। गर्मी और उमस से लोगों की मुसीबत बढ़ गई है।
इस मौसम में तो घरों का कूलर भी काम नहीं आ रहा। इधर किसानों का कहना है कि मानसून को लेकर मौसम विभाग के सारे दावे फेल हो गए हैं। जून माह के चौथे सप्ताह में भी तेज गर्मी और उमस से लोगों को हलकान होना पड़ रहा है। अभी तक अच्छी बारिश जिले में नहीं हुई है।
प्री-मॉनसून एक्टिविटी न होना कम वर्षा का कारण
मौसम विज्ञान केन्द्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप कुमार चौबे ने बताया कि वर्ष 2022 में प्री-मॉनसून की एक्टिविटी न होना कम वर्षा का कारण है। मॉनसून से पूर्व इस एक्टिविटी का होना आवश्यक है।



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