पटना में शादी के 14 साल बाद भी खाकी वर्दी पहनना चाहती हैं रजनी मिश्रा। बताती हैं कि शादी कम उम्र में हो गई, जबकि मैं पढ़ना चाहती थी। पुलिस में भर्ती होना चाहती थी। आज अपने सपनों को साकार करने का मौका मिला है। इसलिए प्रैक्टिस में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।
कुछ ऐसे ही सपने हैं खगड़िया की श्वेता के। जिनकी शादी 8 साल पहले हुई थी। एक बच्चा भी है, लेकिन आज फैमिली-बच्चे को मैनेज करते हुए पटना के गांधी मैदान में पसीना बहा रही है। सपना बस एक ही है, दरोगा में बहाल होना।
दरअसल,बिहार में 2213 दारोगा (सब इंस्पेक्टर) की बहाली के लिए फिजिकल टेस्ट शुरू हो गए हैं। ऐसे में गांधी मैदान में अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। कई कोनों में महिलाओं समेत लड़कियां दौड़, जंप और शॉर्ट पुट करती नजर आ रही हैं। 24 जून तक अलग-अलग फेज में यह टेस्ट हो रहे हैं। इन 2213 पोस्ट के लिए 14856 अभ्यर्थियों ने मेंस परीक्षा उत्तीर्ण की है, जिनमें करीब 5000 महिलाएं हैं। 33% आरक्षण की वजह से इनमें से 730 की बहाली होगी।
इन्हें बॉडी पर सिर्फ वर्दी ही नहीं चढ़ाना है, कंधे पर ‘टू स्टार’ भी चाहिए।
शादीशुदा महिला अभ्यर्थियों में दिखता है गजब का जज्बा
शादी के 14 साल के बाद भी महिलाएं वर्दी की चाह रख रही हैं। प्रैक्टिस कर रही रजनी मिश्रा का कहना है कि उनकी शादी बहुत कम उम्र में करा दी गई थी। मैं पढ़ना चाहती थी, लेकिन शादी के बाद पढ़ाई नहीं कर पाए। आज भी जब प्रैक्टिस के लिए आती हूं तो घरवालों का बहुत दबाव रहता है। पति-बच्चों को साइड करना पड़ता है। ऐसे में थोड़ा मुश्किल है, घर और प्रैक्टिस दोनों ही एक साथ देखना। लेकिन मेरी हमेशा से चाह रही है कि पुलिस की नौकरी करूं। आज मैं बहुत खुश हूं अपनी मर्जी का काम करके।
इसी तरह खगड़िया की श्वेता के पति पटना में इंजीनियर हैं। उनकी शादी को 8 साल हुए हैं। कहती हैं कि बहुत दोस्त-रिश्तेदार पुलिस में हैं और जॉब कर रहे हैं। इसलिए मेरे मन में भी था कि कुछ करना है। एक बच्चा भी है, लेकिन सब मैनेज करना पड़ता है। कभी दर्द वगैरह होता है तो एक दिन आराम कर लेते हैं, फिर अगले दिन से लग जाते हैं।

प्रैक्टिस में लगी लड़कियां।
रोजाना 7-7 घंटे मैदान पर पसीना बहा रही हैं लड़कियां
भास्कर से बातचीत में प्रैक्टिस कर रही गुड़िया, नीपू बताती हैं कि वो पटना के ही दुल्हिन बाजार की रहने वाली हैं। खाकी वर्दी देखकर हमारे अंदर एक अलग जोश आता है। वर्दी पहनने का शौक है। लेकिन सिर्फ वर्दी ही नहीं पहनना है, कंधे पर ‘टू स्टार’ भी चाहिए। अब गांव में प्रैक्टिस करते हैं तो लोग अलग नजर से देखते हैं। इसलिए पटना आकर यह काम करती हैं। यहां 7-7 घंटा टाइम दे रहे हैं। कोच सर बहुत हेल्प करते हैं। प्रैक्टिस के दौरान शारीरिक परेशानी होने पर दवाई खाते हैं या गरम पानी का इस्तेमाल करते हैं।

बाएं से श्वेता और रजनी।
लड़कों से ज्यादा लड़कियों में दिखता है जुनून
प्रैक्टिस करा रहे कोच इंद्रेश का कहना है कि लड़कों के मुकाबले लड़कियों को सिखाना ज्यादा आसान है। उनमें इच्छाशक्ति ज्यादा होती है। लड़कियों में अलग भूख है कि हमें करना है तो बस करना है। चाहे दर्द हो या कुछ भी। वो एक्टिव भी ज्यादा रहती हैं, इसलिए इन्हें ट्रेनिंग देना मेरे लिए ज्यादा आसान होता है।
कोच इंद्रेश 3 साल पहले तक खुद भी दरोगा परीक्षा की तैयारी करते थे। फिर धीरे-धीरे कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग देने लगे। कैंडिडेट्स को सफलता मिलने लगी तो फिर उनके पास भी लड़के-लड़कियां आने लगे।

कोच इंद्रेश।
क्या है फिजिकल टेस्ट पास करने का पैमाना
फिजिकल टेस्ट में 4 टेस्ट अभ्यर्थियों को पास करना होता है। महिला अभ्यर्थियों को 6 मिनट में 1 किलोमीटर की दौड़, 3 फीट की हाई जंप, 9 फीट की लॉन्ग जंप और 10 फीट का शॉर्ट पुट करना जरूरी होता है।
सरकार द्वारा जारी 2213 रिक्तियों के लिए अभी 14856 अभ्यर्थियों ने मेंस परीक्षा उत्तीर्ण किया है, जिसमें 5000 से अधिक महिला अभ्यर्थी हैं। राज्य में महिला आरक्षण लागू होने की वजह से लड़कियों को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। इन 2213 रिक्तियों में कम से कम 727 लड़कियां दरोगा बनेंगी।




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