पटना की रहने वाली 19 साल की युवती के एक किलो के लीवर में आधा किलो का ट्यूमर था। वह 6 माह से दर्द और बुखार से परेशान थी। जब दर्द होता था वह पागल हो जाती थी। वह तड़पने लगती थी। वह इस तरह परेशान होती थी कि दांत से अपने ही हाथ पैर को काटने लगती थी। इलाज के लिए 6 माह तक इधर उधर भटकने के बाद परिवार वाले जब युवती को लेकर IGIMS पहुंचे तो डॉक्टरों ने एक चौथाई लीवर के साथ ट्यूमर को काटकर मरीज की जान बचाई। डॉक्टरों का दावा है कि यह बिहार का पहला मामला है जिसमें लीवर के अंदर से इतना बड़ा ट्यूमर निकाला गया है।
डॉक्टरों ने कहा बिहार दुर्लभ मामला
संस्थान के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और गैस्ट्रो सर्जरी के एचओडी डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि डॉक्टरों ने पटना में लीवर में ट्यूमर की दुर्लभ और काफी जटिल सर्जरी की है। मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि पटना निवासी 19 साल की आरोही कुमारी को 6 माह से पेट में दर्द के साथ बुखार की शिकायत थी। वह 6 माह से दर्द के साथ बुखार से तड़प रही थी। लीवर की सर्जरी करने वाले डॉक्टर संजय कुमार का कहना है कि परिवार वाले 6 माह से इलाज करा रहे थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जब मामला IGIMS के सर्जिकल गैस्ट्रो विभाग की ओपीडी में पहुंचा तो डॉ. संजय कुमार ने कुछ जांच की सलाह दी। मरीज की कई तरह की जांच कराई गई जिसके बाद लीवर में FNH ( फोकल नोडयूलर हाईपरप्लासिया ) की जटिल गांठ का पता चला।
ट्यूमर के साथ काटना पड़ा लिवर
डॉ. संजय कुमार का कहना है कि जांच के बाद लीवर रिसेक्शन ( काटने ) के लिए मरीज को तैयार किया गया। गांठ के गंभीर रुप के चलते आपरेशन काफी जोखिम वाला था, क्याेंकि एक किलो के लिवर के अंदर आधा किलो का ट्यूमर था। लीवर भी एक चौथाई संक्रमित हो गया था। ऐसे में लीवर को भी ट्यूमर के साथ एक चौथाई काटना था। मरीज के लीवर का संक्रमित भाग कूसा नामक मशीन से काट कर हटाया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज ऑपरेशन के बाद से ठीक है। निगरानी के लिए उसे आईसीयू में रखा गया है। डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि उनकी देखरेख में डॉ. संजय कुमार और उनकी टीम के डॉ. बेंकट राव, डॉ. लाजपत के साथ मेडिकल स्टाॅफ के सहसोग से ऑपरेशन किया गया।






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