पटना में लोगों की सहूलियत के लिए जिस ई-रिक्शा की शुरुआत की गई थी अब ये लोगों की परेशानी बनने लगा है। 5 साल से राजधानी में ई-रिक्शा का न तो रूट निर्धारित हो सका है और न किराया। रिक्शा चालक अपनी मर्जी से रूट और किराया तय कर रहे हैं। इससे राजधानी में कई मुख्य सड़कों पर जाम की स्थिति तो रहती ही है मनमाना किराया वसूलने से भी यात्री परेशान रहते हैं।
हैरानी इस बात की है कि लोगों की इस परेशानी का प्रशासन को खबर तक नहीं है। पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है। हालांकि अपने अधिकारिक तेवर में वे कहते हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जिस रूट पर ऑटो उसी पर ई-रिक्शा, इसके कारण लग रहा जाम
लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि शहर के जिस रूट पर ऑटो का संचालन होता है उसी पर ई-रिक्शा भी चलाया जा रहा है। ऐसे में यात्रियों के होड़ के चक्कर में सड़कें जाम होती है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के सूत्रों की मानें तो पटना की सड़कों पर रोज 12-15 हजार ई-रिक्शा का संचालन किया जा रहा है।

ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि वे हर टैक्स देने के लिए तैयार हैं।
डीजल महंगा होते ही हर रूट में 3-5 रुपए बढ़ाया किराया
गांधी मैदान से राजापुल के बीच ऑटो चलाने वाले कहते हैं कि एक महीने पहले तक यहां का किराया 7-8 रुपए किराया था। डीजल-पेट्रोल का दाम बढ़ने के बाद इसे बढ़ाकर 10 रुपए कर दिया गया है। यही स्थिति लगभग जगदेव पथ से फुलवारी, गांधी मैदान से पटना सिटी व हर रूट पर चलने वाले ई-रिक्शा का है।
अब, ई-रिक्शा पर खर्च के गणित को समझिए
एक ई-रिक्शा को खरीदने में 1.5-2 लाख रुपए का खर्च आता है। एक बार फुल चार्ज होने पर इसे दिन भर चलाया जा सकता है। फुल चार्ज करने में 80-100 रुपए की बिजली का खर्च होता है। वहीं इससे रोजाना लगभग 1000-1200 रुपए की आमदनी होती है। ई-रिक्शा के संचालन में पेट्रोल या डीजल की किसी प्रकार की कोई जरूरत नहीं होती है।
ई-रिक्शा चालक ने कहा- हम हर टैक्स देने के लिए तैयार हैं
ई- रिक्शा चालक ने कहा कि वे हर तरह का टैक्स देने के लिए तैयार हैं लेकिन देना कहां है इसकी उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इंतजाम नहीं होने के कारण उन्हें आए दिन पुलिस वाले परेशान करते हैं। उन्हें रोजाना ई-रिक्शा चलाने के लिए पुलिस वाले को अलग से टैक्स देना पड़ रहा है।
किराया निर्धारण की क्या है प्रक्रिया
DM चंद्रशेखर सिंह के मुताबिक प्रमंडल स्तर पर किराया निर्धारण कमेटी बनाई गई है। इसमें ऑटो चालक संघ, जिला प्रशासन और यात्री कमेटी के सदस्य शामिल होते हैं। इनसे चर्चा के बाद ही किराए का निर्धारण किया जाता है। इनकी बैठक हर साल एक तय समय पर होती है। इस बैठक में निर्धारित किराए को ही लागू किया जाता है।







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