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बिहार की जेलों में बहुत भीड़ है, NHRC ने किया निरीक्षण; आसपास बने भवन सुरक्षा में सेंध लगा रहे

बिहार का जेलों में कैदियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वह आपस में लड़ते रहते हैं। बिहार की जेलों में कैदियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि उनको चर्म रोग होता है। बिहार के जेलों में गंदगी इतनी ज्यादा है कि कैदी बीमार हो जाते हैं। जेलों के आसपास की बिल्डिंगे, जेल के सुरक्षा को सेंध लगा सकते है। जी हां, यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के तरफ से तीन सदस्यीय टीम ने कही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य डॉ डी एम मूले के नेतृत्व में 3 सदस्य टीम ने छपरा और पटना की जेलों का निरीक्षण किया। जिसमें उन्होंने पाया कि जेलों में कैदियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वह संघर्ष पर उतारू रहते हैं।

डीएम मूले ने बताया कि कैदियों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ी बाधा ज्यादा संख्या में रह रहे कैदियों के कारण हो रही है। इससे कई समस्याएं हो रही है और यह कैदियों की सुरक्षा के लिए भी बेहतर नहीं है। जेलों में सीवरेज सिस्टम की व्यवस्था बहुत खराब है। जिससे जेलों में कई बीमारियां फैलती है। छपरा और पटना के जेलों में सुरक्षा के कई ऐसे कारण हैं जिसको बढ़ाना जरूरी है। हाई मास्ट लाइट, सीसीटीवी कैमरा सहित कई तरह की सुविधा होनी चाहिए। महिला कैदियों में हो रहे चर्म रोग और तमाम चीजों को लेकर जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग को ज्यादा सजग रहना चाहिए और इसको लेकर यदि कोई रिसर्च हो तो करनी चाहिए। वही महिला कैदियों के वार्ड में भी ज्यादा संख्या होने के कारण उनको चर्म रोग होता है। सूले ने बताया कि बिहार में एनजीओ की गतिविधियां काफी कम हैं और उस पर काम भी नहीं कर रही हैं। यहां मुफ्त में कानूनी सलाह नहीं दी जा रही है। यहां बेल पर छोड़ा नहीं जा रहा है।

डीएम मुले ने बताया कि छपरा में एक कैदी की मौत हो गई थी, जिसमें यह बताया गया था कि मिथाइल अल्कोहल की वजह से उसकी मौत हुई थी। राष्ट्रीय मानवाधिकार को यह लगा कि यह मिथाइल अल्कोहल कैसे वहां पहुंचा और उसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार ने पटना और छपरा के जिलों का निरीक्षण किया, जिसमें कई कमियां नजर आई। उन्होने बताया कि जेल के आसपास बने भवन भी जेल की सुरक्षा में सेंध लगा रहे हैं।

वहीं, राज्य सरकार के तरफ से जेल आईजी मनीष कुमार मीणा ने बताया कि राज्य सरकार की कोशिश है कि जिलों की संख्या बढ़ाई जाए। बिहार में 47,500 कैदियों के रहने की व्यवस्था है लेकिन बिहार के जिलों में 64,000 कैदी बंद है। बिहार में 59 जेल हैं। 5 नए जेल बनने हैं। जल्द ही भवन निर्माण विभाग उसको हैंडओवर करने वाला है। जहां भूमि उपलब्ध है वहां नया बैरक बनाया जा रहा है। हमलोग कैदियों को मुफ्त कानूनी सलाह और बेल को लेकर व्यवस्था करने वाले हैं।

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