सूबे के सबसे सुदूर इलाके में आदिवासी महिलाएं मशरूम की खेती कर आत्मनिर्भर बन रहीं है। महिलाओं का समूह अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रहा है। जीविका दीदी औऱ राष्ट्रीय बागवानी मिशन इनके लिए वरदान साबित हो रहा है । रामनगर प्रखंड के जंगल और पहाड़ों के बीच दुर्गम दोन के इलाके में मशरूम की खेती कर दर्ज़नों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। दोन की महिलाएं घर बैठे मशरूम उत्पादन की प्रशिक्षण ले रही हैं और तब मशरूम की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। नौरंगिया दोन की महिलाओ ने बताया कि पहले मजदूरी करते थे और उसी से अपना जीवन यापन चलाते थे।

लेकिन आज राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत बड़े पैमाने पर मशरूम कि खेती कर प्रति दिन एक हज़ार से ज्यादा प्रति महिला मुनाफा कमा रहीं हैं जब कि यहाँ गाँव में ही SSB या पुलिस विभाग में 150 रूपये प्रति किलो मशरूम बिकता है । अगर इसकि बिक्री शहरो तक होती तो गांव के लोगों को और ज्यादा मुनाफा हो सकता है लिहाजा ज़रूरत अब बाज़ार तक पहुंचने का है तब जाकर महिलाओं के रोजगार को परवान चढ़ने में पंख लगेगा ।
वही रामनगर के क़ृषि पदाधिकारी प्रदीप कुमार तिवारी ने बताया कि यह योजना सम्पूर्ण बिहार के लिए है लेकिन चंपारण में नौरिंगिया दोन पंचायत के 2 गावं फ़िलहाल इसे चलाया जा रहा है और मशरूम कि खेती के लिए सरकार ने अनुदान भी दे रखा है जो घर बैठे रोजगारपरक बनाने में मिल का पत्थर साबित हो रहा है ।







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