मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इफ्तार की दावत कबूल की और पांच साल बाद राबड़ी देवी के आवास में वे पैदल लौटे। नीतीश कुमार ऐसे समय में राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और तेजप्रताप यादव का निमंत्रण स्वीकार कर पहुंचे जब एक दिन बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और नरेन्द्र मोदी के बड़े रणनीतिकार अमित शाह पटना आ रहे हैं। शाह, बाबू कुंवर सिंह के विजयोत्सव में शामिल होने आरा जा रहे हैं। कुछ दिन पहले नीतीश कुमार ने जब झुक कर नरेन्द्र मोदी को प्रणाम किया था, उस समय खूब चर्चा हुई थी कि नीतीश कुमार भाजपा के आगे टूट गए हैं। लेकिन नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी के आवास पर पहुंच कर बता दिया कि वे सेकुलर नेता हैं। तिलक से लेकर टोपी तक का सदभाव समझते हैं!
सेक्युलेर चेहरा दिखाया भाजपा ने
जब नीतीश कुमार पहुंचे तो भाजपा ने भी अपना सेकुलर चेहरा दिखाने की कोशिश की। भाजपा के मंत्री शाहनवाज हुसैन भी इफ्तार में पहुंचे। यह और बात है कि भाजपा और जदयू के टिकट पर जीते हुए एक भी विधायक नहीं हैं लेकिन दोनों पार्टियों ने अपने-अपने कोटे से मुसलमान नेता को मंत्री बनाया। चाहे इसके लिए किसी को एमएलसी बनाने की नौबत आई या फिर बसपा से विधायक तोड़ कर लाना पड़ा। यह बिहार में 16 फीसदी मुस्लिम वोट बैंक का असर है।
तेजस्वी यादव का निमंत्रण चिराग पासवान ने भी कबूला और दो उपचुनाव व 24 सीटों पर एमएलसी चुनाव में महागठबंधन से बाहर कर दी गई कांग्रेस ने भी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा और पूर्व मंत्री व कांग्रेस चुनाव कंपेन कमेटी के चेयरमैन अखिलेश सिंह पहुंचे।
अखिलेश सिंह ने कहा कि बिहार में राजनीतिक परिवर्तन होगा। इफ्तार में विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी,अब्दुलबारी सिद्दीकी, श्याम रजक, शक्ति यादव, चित्तरंजन गगन, एजाज अहमद आदि कई नेता मौजूद रहे। बोचहां उपचुनाव से कोई बड़ा राजनीतिक परिवर्तन नहीं हुआ है लेकिन उस जीत का असर आयोजन में खूब दिखा।



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