पटना में राजभवन मार्च के दौरान लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के ऊपर पुलिस ने मंगलवार को आंसू गैस का गोला छोड़ा था। लाठीचार्ज भी किया गया था। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान समेत कई नेताओं को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया था। बुधवार को पटना में प्रेस कांफ्रेंस कर चिराग पासवान ने लाठीचार्ज को लेकर सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है।
उन्होंने कहा कि मंगलवार को दुःखद दृश्य देखने को मिला है। सीएम नीतीश कुमार बिहारियों के खून के प्यासे हैं। पटना पुलिस की टीम वही कर रही थी, जिसे करने के लिए ऊपर से निर्देश दिया गया था। लोजपा (रामविलास) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रौंदने का आदेश उन्हें मुख्यमंत्री की तरफ से मिला था। आंसू गैस का गोला छोड़कर और लाठीचार्ज कर पुलिस ने उसी आदेश का पालन किया। लाठीचार्ज में पार्टी के कुछ नेता और कई कार्यकर्ताओं को गंभीर चोट आई थी।
आपराधिक वारदात पर मौन साध लेते हैं नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए चिराग न कहा कि जब भी बड़े आपराधिक वारदात हुए हैं। उस पर वो कुछ नहीं बोलते हैं। उनका कोई बयान नहीं आता है। नीतीश कुमार पूरी तरह से मौन साधे रहते हैं। वो भाजपा की कृपा से मुख्यमंत्री बने हैं। बड़े मामलों में उनके मौन साधने पर भाजपा भी कुछ नहीं कहती है। जब शांतिपूर्ण तरीके से पार्टी का राजभवन मार्च चल रहा था तो सवाल यह है कि मेरे कार्यकर्ताओं पर कल लाठी क्यों चली? नीतीश कुमार को इसका जवाब देना होगा।
चिराग ने आरोप लगाया कि उस दौरान पुलिस ने महिला कार्यकर्ता के गाल पर मारा, पार्टी के युवा नेता को ऐसा मारा कि उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया है। पार्टी के 1-1 कार्यकर्ता को 3-3 पुलिस वालों ने घेर कर मारा। कार्यकर्ताओं को दौड़ा- दौड़ा कर मारा गया। इस पर चिराग ने पूछा कि ऐसा क्यों किया गया? क्या हम आतंकी-उपद्रवी हैं? चिराग ने सवाल कोतवाली थाना में दर्ज हुए FIR और उसमें लगाई गई IPC की धाराओं पर भी उठाया। मजिस्ट्रेट के बयान पर कोतवाली थाना जो FIR हुई, उसमें चिराग पासवान का नाम नहीं है। इस पर सवाल उठाते हुए चिराग ने पूछा कि क्या नीतीश कुमार डरते हैं?
बड़े आंदोलन की हो गई है शुरुआत
अपना गुस्सा जाहिर करते हुए चिराग ने कहा कि नीतीश कुमार का असली घिनौना चेहरा सामने आ गया है। चिराग का आरोप है कि जब लाठीचार्ज और गिरफ्तारी के बाद उनकी मां उनसे मिलने के लिए थाना जा रही थीं। मगर, उनकी मां को उनसे मिलने नहीं दिया गया। पिछले 44 साल में ऐसा पहली बार हुआ। पहली बार मेरी माँ को रोक गया। 15 फरवरी को बिहार में एक बड़े आंदोलन का आगाज हुआ है। जो जेपी आंदोलन से बड़ा आंदोलन होगा। चिराग ने एक बार फिर से मध्यावधि चुनाव का दावा करते हुए कहा है कि बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट के मुद्दे पर लड़ाई लड़ते हुए नीतीश सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। हम सरकार बनाएंगे।
इससे फर्क नहीं पड़ता कि 15 साल पहले क्या था?
अक्सर जदयू और भाजपा के नेता राजद के 15 साल की सरकार की याद दिलाते हैं। इस पर निशाना साधते हुए चिराग ने मुद्दा उठाया कि 15 साल से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार फिसड्डी साबित हुआ है। 15 साल पहले बिहार में क्या था? इससे फर्क नहीं पड़ता है। फर्क इससे पड़ता है कि पिछले 15 सालों में आपने क्या किया? नीतीश कुमार की सरकार में एक भी नया कारखाना नहीं खुला। जो कारखाने चल रहे थे वो भी बंद पड़ गए। शिक्षा पर बात भी नहीं करते।
टूरिज्म को भी बढ़ावा नहीं दिया। शराबबंदी के नाम पर बिहारियों को अलग-अलग तरह के नशों में झोंक दिया है। युवा आबादी पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। यूनिवर्सिटी में छात्र हंगामा कर रहे हैं, STET के उम्मीदवार धरना दे रहे हैं। इस पर कोई कुछ बोलता भी नहीं है। छात्र और युवा अपनी मांग मांगते हैं तो उन्हें पुलिस की लाठी मिलती है।



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