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प्रशासनिक लापरवाही:59 भूखंडों के विवाद में से अभी भी 24 का नहीं हो सका है निष्पादन

खरीफ फसल खासकर धान रोपाई के समय रोहतास के 19 प्रखंडों में लगभग पांच दर्जन वैसे विवादित भूखंड सामने आए थे। जिस पर कब्जे के लिए दोनों पक्ष आमने सामने होकर खूनी संघर्ष पर उतारू हुए। तीन दर्जन से ज्यादा विवादित भूखंडों पर गोलियां चली। अब भी 24 वैसे विवादित भूखंड बरकरार हैं। जहां प्रशासन ने समाधान नहीं निकाला है। धान की फसल पक चुकी है। जिसे काटने के लिए दोनों पक्ष तैयार है। हालांकि धारा 144 लगाई गई जरूर गई है। फिर भी फसल कटाई को लेकर संघर्ष की आशंका है। इस वर्ष जून महीने में जिले के 19 प्रखंडों में 59 वैसे विवाद सामने आए थे जिन पर दो पक्ष जमीन दखल करना चाहता था। इसके लिए सभी मामलों में कम से कम मारपीट तो हुई ही। सात लोगों की जाने भी गई। लगभग तीस लोग घायल हुए। जिसमें आधा से ज्यादा महिलाएं थी।
सबसे ज्यादा विवाद करगहर में, सबसे कम संझौली : जिले में विवादित भूखंडों को लेकर सबसे ज्यादा समस्याएं करगहर की आई थी। हालांकि 20 पंचायतों के कारण बड़ा प्रखंड व बड़ा अंचल भी है। जिसमें 11 ऐसे मामले सामने आए थे। जो भूमि विवाद से जुड़े हुए थे। सबसे कम चार मामले संझौली से आए थे। जबकि नोखा, नासरीगंज, डेहरी में सात- सात, दावथ, दिनारा, काराकाट में पांच- पांच के बड़े आंकड़े थे। इन विवादों के कारण प्रशासन की काफी किरकिरी भी हुई थी। हालांकि प्रशासन ने 35 मामलों को निपटा भी लिया था। कुछ मामले कोर्ट में चल रहे हें। जिसके वजह से प्रशासन की दखल अंदाजी संभव नहीं है। फिर भी 24 की संख्या में बचे बड़े भूमि विवाद धान की फसल काटने के दौरान खूनी संघर्ष की आशंका पैदा करते हैं।
ज्यादातर विवाद भाई-भाई में : इन भूमि विवादों के बारे में जानकारी इकट्‌ठा करने पर पता चला कि सबसे ज्यादा बड़े -बड़े विवाद या तो सहोदर या चचेरे भाईयों के बीच है। इन्हीं विवादों के कारण सात लोगों की आपसी गोलीबारी या खूनी संघर्ष के बीच मौतें भी हुई थी। जिले के लगभग थानों में भाई भाई के बीच भूमि विवाद के मामले लंबित पड़े हुए हैं। इसके अलावे सार्वजनिक संपत्ति और मठ मंदिरों के जमीन को लेकर भी जिले में कई जगहों पर अक्सर बंदूकें तनती रही हैं।
अंचल कार्यालयों की लापरवाही है बड़ी कारण
जिले में भूमि विवाद को लेकर आए दिन घटनाएं घट रही हैं। जो पुलिस व प्रशासन, न्यायालय व सरकार के लिए सरदर्द बना हुआ है। भूमि विवादों के कारणों की पड़ताल से यह स्पष्ट रूप से खुलकर सामने आता है कि जिले के विभिन्न अंचल कार्यालयों की लापरवाही सबसे बड़ी कारण है। अंचल कार्यालय के अधिकारी और कर्मियों के द्वारा अपने अधिकारों का दुरूपयोग कर अवैध तरीके से दाखिल खारिज कर दिया जाता है। जिसके बाद बेवजह जमीन पर विवाद उत्पन्न हो जाता है। जिले के सदर अंचल के अलावे लगभग सभी अंचल कार्यालयों की स्थिति यही है। जहां दाखिल खारिज में गड़बड़ी के कारण दर्जनों विवाद बढ़े हैं।

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