गया: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच जीतन राम मांझी की हम पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है. पार्टी के राष्ट्रीय संगठन सचिव प्रो. कौशलेंद्र कुमार और पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. राधेश्याम प्रसाद ने अपनी प्राथमिक सदस्यता और पद से इस्तीफा दे दिया है. इन दोनों नेताओं ने अपनी पूरी कमेटी के साथ यह कदम उठाया है, जो पार्टी के लिए एक गंभीर चुनौती साबित हो सकता है.

जीतन मांझी के साथ टूटा पुराना साथ
हम पार्टी के इन दो प्रमुख नेताओं ने लंबे समय से जीतन राम मांझी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी को मजबूत करने का काम किया था. प्रो. कौशलेंद्र कुमार राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं, जबकि प्रो. राधेश्याम प्रसाद पिछड़े वर्गों के बीच पार्टी की पैठ बढ़ाने के लिए जाना जाते हैं. इनके इस्तीफे से पार्टी का संगठनात्मक ढांचा कमजोर पड़ सकता है.

क्यों दिया इस्तीफा
दोनों नेताओं ने कहा है कि वे पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा के बावजूद अब आगे नहीं चल पा रहे, क्योंकि नेतृत्व की नीतियां उनके मूल्यों से मेल नहीं खा रही. यह कदम न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामूहिक विद्रोह का रूप ले चुका है, जो पार्टी के अन्य सदस्यों को भी प्रभावित कर सकता है.

टिकट वितरण में धनबल और जातिवाद का आरोप
इस्तीफे के पीछे सबसे बड़ा कारण बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर लगाए गए गंभीर आरोप हैं. प्रो. कौशलेंद्र कुमार और प्रो. राधेश्याम प्रसाद ने जीतन राम मांझी और उनके पुत्र संतोष कुमार सुमन पर धनबल के दुरुपयोग का आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि टिकट वितरण में पैसों का खेल हुआ, जिससे मेहनती कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया.

मेहनतकश नेताओं पर अन्याय
पार्टी के इन वरिष्ठ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों से पार्टी के लिए पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं को दरकिनार कर दिया गया. टिकटों का वितरण केवल वित्तीय क्षमता और जातिगत समीकरणों पर आधारित रहा, न कि योग्यता और मेहनत पर. प्रो. राधेश्याम प्रसाद ने विशेष रूप से पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ की कमेटी के सदस्यों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मेहनत का कोई सम्मान नहीं हुआ. इस अन्याय से न केवल इस्तीफा देने वाले प्रभावित हुए, बल्कि पूरे संगठन में असंतोष की लहर दौड़ गई है.

सभी प्रत्याशियों को हराने का ऐलान
सबसे चौंकाने वाला हिस्सा तब आया जब दोनों नेताओं ने हम पार्टी के सभी प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में हराने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि वे अपनी पूरी ताकत लगा देंगे ताकि पार्टी को सबक सिखाया जा सके. यह घोषणा हम पार्टी के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर रही है, क्योंकि प्रो. कौशलेंद्र कुमार जैसे संगठन विशेषज्ञ का विरोध पार्टी की जमीनी स्तर की रणनीति को चोट पहुंचा सकता है. नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अब स्वतंत्र रूप से सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ेंगे.


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