MUZAFFARPUR

बिहार विधानसभा में दलबदल की लहर: राजद को सबसे बड़ा झटका, बीजेपी ने तोड़े सबसे ज़्यादा विधायक

बिहार : बिहार विधानसभा के 2020 के चुनाव के बाद पिछले पाँच वर्षों में दलबदल का दौर तेज़ रहा। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, कुल 17 विधायक निर्वाचित होने के बाद अपनी-अपनी पार्टियों को छोड़कर दूसरी पार्टियों में शामिल हो गए। इसका सबसे अधिक फायदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा ने इस दौरान तीन अलग-अलग पार्टियों से सात विधायक अपने खेमे में शामिल किए। वहीं राजद और जदयू ने भी पाँच-पाँच विधायकों को अन्य दलों से जोड़ने में सफलता पाई।

दलबदल करने वालों में राजद के दो विधायक भारद बिंद और संगीता कुमारी, तथा कांग्रेस के दो विधायक मुरारी प्रसाद गौतम और सिद्धार्थ सौरव भाजपा में शामिल हुए। दूसरी ओर, राजद ने एआईएमआईएम के चार विधायक मोहम्मद इज़हार असफी, मोहम्मद अंजार नईमी, शाहनवाज और सैयद रुकनुद्दीन अहमद को शामिल किया। इसके अलावा, जदयू की बीमार भारती भी राजद में आ गईं।

वहीं जदयू ने राजद के तीन विधायक — चेतन आनंद, नीलम देवी और प्रहलाद यादव, बसपा के मोहम्मद ज़मा खान और लोजपा के राज कुमार सिंह को अपने पाले में किया। दिलचस्प बात यह रही कि राजद ने सबसे अधिक पाँच विधायक अन्य दलों में खो दिए, जबकि भाजपा और भाकपा (माले) जैसे दलों के किसी विधायक ने पार्टी नहीं छोड़ी।

एडीआर रिपोर्ट में विधानसभा की कार्यवाही पर भी प्रकाश डाला गया है। नवंबर 2020 से जुलाई 2025 के बीच कुल 15 सत्रों में 146 बैठकें हुईं — औसतन विधानसभा प्रति वर्ष 29 दिन ही बैठी। इनमें दूसरा और पाँचवां सत्र सबसे लंबे रहे, जिनमें 22-22 बैठकें हुईं।

इन पाँच वर्षों में 251 विधायकों ने कुल 22,505 प्रश्न पूछे। सबसे अधिक भाजपा विधायक अरुण शंकर प्रसाद (275 प्रश्न) और कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह (231 प्रश्न) सवाल पूछने में अग्रणी रहे। इस अवधि में कुल 99 विधेयक पेश किए गए, और सभी उसी दिन पारित भी कर दिए गए।

 

 

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