पटना : बिहार में आज धनतेरस पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है. इस दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व होता है. पटना के ज्योतिषाचार्य पंडित प्रेम सागर पांडे ने बताया कि इस वर्ष धनतेरस शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 को मनाई जा रही है और पूरे दिन शुभ योग बना हुआ है.

शाम 6:50 से 8:15 तक रहेगा सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
बिहार में आज धनतेरस की पूजा का सबसे शुभ समय शाम 6:50 बजे से 8:15 बजे तक रहेगा. इस दौरान प्रदोष काल भी रहेगा जो पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है. उन्होंने बताया कि इस अवधि में माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना करने से घर में धन, ऐश्वर्य और सुख की वृद्धि होती है. पंडित पांडे ने कहा कि प्रदोष काल के बाद या तिथि समाप्त होने के बाद पूजा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे शुभ फल में कमी आती है.
इस मंत्र का करें जाप
पूजा में चावल, फूल, दीपक, धूप, गंगाजल, मिठाई और सिक्के का विशेष प्रयोग करें. पूजा के दौरान ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’, ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कुबेराय नमः’ और ‘ॐ धन धन्वंतरये नमः’ मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ होता है.

लक्ष्मी और कुबेर आरती से पूरी होती है पूजा
पंडित पांडे ने बताया कि पूजा के अंत में माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आरती जरूर करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आरती के बाद परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करें और घर के हर कोने में दीप जलाकर माता लक्ष्मी का स्वागत करें. धनतेरस पर गाय को चारा खिलाना और गरीबों को दान देना भी शुभ माना गया है.
इन मुहूर्तों में पूजा करने से बचें
पंडित प्रेम सागर पांडे ने बताया कि आज शाम का शुभ समय सीमित है, इसलिए लोगों को चोघड़िया या राहुकाल के दौरान पूजा करने से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब ग्रहों का योग अशुभ हो या रात में तिथि समाप्त हो जाए, उस समय पूजा नहीं करनी चाहिए. देर रात या प्रदोष काल के बाद की गई पूजा से फल की प्राप्ति कम हो जाती है.

धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या नहीं ?
पंडित प्रेम सागर पांडे के अनुसार, धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन, वाहन, झाड़ू और दीपक खरीदना शुभ होता है. वहीं प्लास्टिक और काले रंग के कपड़े अथवा जूता चप्पल खरीदने से परहेज करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज के दिन खरीदी गई वस्तु घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है और आर्थिक समृद्धि का मार्ग खोलती है. इस दिन तांबे का बर्तन खरीदना अति शुभ होता है.

धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का पर्व
धनतेरस न केवल धन की देवी लक्ष्मी की आराधना का पर्व है बल्कि भगवान धन्वंतरि की जयंती भी है. पंडित प्रेम सागर पांडे ने कहा कि इस दिन स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के साथ पूजा करने से वर्षभर शुभ फल की प्राप्ति होती है. उन्होंने कहा ‘धनतेरस का अर्थ सिर्फ धन नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति से है. यही पूजा का वास्तविक उद्देश्य है.’ भगवान धन्वंतरि उत्तम स्वास्थ्य देते हैं और शास्त्रों में मनुष्य के स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन बताया गया है.



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