मुजफ्फरपुर : मुजफ्फरपुर के मझौलिया चौक स्थित एक निजी सभागार में नवोत्साह साहित्य संगम की मुजफ्फरपुर जिला इकाई का भव्य गठन समारोह एवं हास्य कवि सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम को तीन सत्रों में आयोजित किया गया, जिसमें जिला इकाई का गठन, अतिथियों का सम्मान एवं कवि सम्मेलन शामिल था।
प्रथम सत्र: जिला इकाई का गठन
मुजफ्फरपुर जिला इकाई के पदाधिकारियों की घोषणा की गई, जिनमें:
•इब्रान मंसूरी — अध्यक्ष
•अमीर हमजा — उपाध्यक्ष
•सुमन वृक्ष — महासचिव
•सागर श्री — सचिव
•अभय कुमार शब्द, आर्यन राज एवं प्रतोष कुमार — सदस्य नियुक्त किए गए। वहीं, डॉ. संजय कुमार संजू, एम. एस. हुसैन आज़ाद एवं राहुल कुमार को संरक्षक बनाया गया। डॉ. कुमार विरल को संस्था का साहित्यिक मार्गदर्शक नियुक्त किया गया।

द्वितीय सत्र: उद्घाटन व सम्मान समारोह
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. गौरव वर्मा, विशिष्ट अतिथि डॉ. संजय कुमार संजू, डॉ. कौशल किशोर चौधरी, डॉ अरविंद कुमार ,अविनाश कुमार पांडेय, डॉ. कुमार विरल, उत्पल भारद्वाज, ओंकार कश्यप, इब्रान मंसूरी, सुमन वृक्ष, कंचन पाठक एवं डॉ. अंशु द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश कुमार पांडेय ने कहा,
“इस संस्था का उद्देश्य नए रचनाकारों को मंच देना है ताकि वे अपनी लेखनी के माध्यम से देश-विदेश में गाँव-समाज का नाम रोशन कर सकें।”
प्रांतीय अध्यक्ष श्री उत्पल भारद्वाज ने कहा,
“डिजिटल युग में साहित्यिक चेतना आवश्यक है, ताकि लोग ‘रील’ की बजाय ‘रियल’ जीवन को समझ सकें।”
मुजफ्फरपुर जिला अध्यक्ष इब्रान मंसूरी ने कहा,
“मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार की सांस्कृतिक राजधानी है, ऐसे आयोजन यहाँ की पहचान को और मजबूती देंगे।”
इस सत्र में अतिथियों को स्मृति-चिह्न एवं अंग वस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। संचालन सुमन वृक्ष द्वारा किया गया।

तृतीय सत्र: कवि सम्मेलन
इस सत्र की शुरुआत हेमा सिंह द्वारा सरस्वती वंदना से हुई।
इसके पश्चात वैशाली से आए युवा शायर सरफ़राज़ अहमद ‘हिंदुस्तानी’ ने शायरी सुनाकर तालियाँ बटोरी।
आर्यन राज ने – “शांति है सौम्यता का, प्रस्फुटित हैं जिससे धर्मराह।, वो एक नाम राम है, विलय है जिसमें अग्निदाह।, सागर श्री ने ग़ज़ल का शेर पढ़ा- “ये तो माली बताएगा कि बागों में गुलाब क्या था, हमसे न पूछिए कि हमारा रुतबे-रुबाब क्या था, ” मुस्कान केशरी की पंक्तियाँ रहीं- “ज़िंदगी को ज़िंदगी हम कह रहे, कुछ खुशी, कुछ ग़म मगर हम सह रहे। अभय कुमार शब्द ने कहा-“कैसे तुझ पे यकीं हम करें, तू भरोसे के क़ाबिल नहीं”, सीतामढ़ी से आए गौतम कुमार वात्स्यायन ने पढ़ा:-“मुझको उसका चेहरा पल‑पल खींच रहा, सागर जैसे दरिया का जल खींच रहा।”, नवादा से आए नितेश कपूर ने देशप्रेम की कविता पढ़ी- “फिज़ा में आज कुछ बदलने की आशंका है, फिर अग्नि में आज जलने को तैयार लंका है।” पटना से धनंजय कुमार ने शेर सुनाया- “जी भर न देखा, निगाहों में खो गए, आँखों के पानी से दामन भींगो गए।”, इसके बाद हेमा सिंह ने प्रेमरस की कविता पढ़ी- “लो गई उम्र की शाम ढल प्रेम में, ज़िंदगी बन गई एक ग़ज़ल प्रेम में।” सीतामढ़ी के ईशान गुप्ता ने रोमांटिक शेर सुनाए-“हर मुलाक़ात में उसे शिताब बहुत है, यही एक बात उसमें खराब बहुत है ”, राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश कुमार पांडेय ने प्रेरणादायक पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं -“नहीं जो चोर ले सकता, न राजा काट सकता है।

विशेष उपस्थिति व मंच संचालन
इस कवि सम्मेलन में भागलपुर से मनजीत सिंह किनवार, सीतामढ़ी से काजल चौधरी, मधुबनी से स्वतंत्र शांडिल्य, दिल्ली से कंचन पाठक, डॉ. गौतम श्रीवास्तव, डॉ. पंकज कर्ण, सूची रानी, उत्पल भारद्वाज (नवादा) आदि कवियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को ऊँचाइयाँ दीं। मंच संचालन हास्य कवि अमीर हमजा द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन इब्रान मंसूरी द्वारा दिया गया।



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