MUZAFFARPUR

नेपाल की जेल तोड़ कर भागे कैदियों की भारत में घुसने की कोशिश, SSB ने 10 को पकड़ा

पड़ोसी मुल्क नेपाल में उथलपुथल मचा हुआ है। यहां युवा सड़क पर उतर चुके हैं और अब कमान सेना ने संभाल ली है। इस दौरान नेपाल में जेल ब्रेक कांड भी हो गया। नेपाल के जलेश्वर जेल ब्रेक कांड के बाद फरार हुए दस कैदी मंगलवार की देर रात चोरी-छिपे भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश करते हुए एसएसबी की निगरानी में पकड़े गए। जवानों ने इन्हें हिरासत में लेकर भिठ्ठा व सुरसंड थाना पुलिस के हवाले कर दिया। पकड़े गए कैदियों में आठ नेपाली और दो भारतीय नागरिक शामिल हैं। प्रथम दृष्टया सभी कैदी जलेश्वर कारागार से भागे हुए विचाराधीन बंदी बताए जा रहे हैं।

 

भिठ्ठा थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि गिरफ्तार कैदियों में नेपाल के धनुषा जिला के मुखियापट्टी मुसहरनिया निवासी रामगुलाम महतो, औरही थाना क्षेत्र के हसनपुर नगरपालिक निवासी विनोद राय, महोत्तरी के धिरापुर गांव निवासी मोजाहिद अंसारी, लोहरपट्टी थाना क्षेत्र के खुट्टा पिपराढ़ी निवासी सुरेन्द्र साह सोनार, धनुषा के कुर्था गांव निवासी इंद्रेश मंडल तथा धनुषा के यदुकाहा निवासी कृष्ण कुमार महतो शामिल हैं।

इनके साथ बिहार के वैशाली जिला हाजीपुर निवासी मोहन कुमार को भी पकड़ा गया है। इसी तरह सुरसंड थानाध्यक्ष धनंजय कुमार पांडे ने बताया कि थाना क्षेत्र से मोतिहारी जिला के परसौनी खेम निवासी गुड्डू कुमार, जलेश्वर वार्ड संख्या-1 निवासी रियाज दफाली तथा नेपाल के हेठौढ़ा वार्ड संख्या-3 निवासी राजेश तमांग को हिरासत में लिया गया है। फिलहाल सभी को संबंधित थानों में रखा गया है।

पुलिस ने बताया कि वरीय पदाधिकारियों के निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि कि मंगलवार को हुए जलेश्वर जेलब्रेक में 577 कैदियों में से 576 कैदी फरार हो गए थे, जबकि एक बंदी को नेपाल की सशस्त्र प्रहरी ने पकड़ लिया था। इस घटना के बाद महोत्तरी जिला में कर्फ्यू लागू है। सीमा क्षेत्र सहित जलेश्वर नगर में सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।

नेपाल में जमकर बवाल

भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ सुलगी विरोध की चिंगारी से नेपाल सुलग रहा है। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट को आग के हवाले कर दिया। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के निजी आवास से लेकर कई मंत्रियों और नेताओं के घरों, दफ्तरों में तोड़फोड़ एवं आगजनी की। आक्रोश के आगे सरकार को झुकना पड़ा और प्रधानमंत्री ओली ने इस्तीफा दे दिया।

नेपाल सरकार ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध हटा लिया था, लेकिन इससे भी भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ। प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और 19 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदारी की मांग पर अड़े रहे। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व पीएम पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक के घरों पर भी तोड़फोड़ की।

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