बिहार: बिहार में चल रहे एसआईआर (Special Investigation Report) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. कोर्ट ने कहा है कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए अब ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है.

इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में बताए गए दस्तावेज़, जैसे कि ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक पासबुक, या पानी का बिल, को भी पहचान और पते के सबूत के तौर पर स्वीकार किया जाएगा. इस फैसले से मतदाताओं को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने में आसानी होगी.

SC कोर्ट में सुनवाई पूरी
सुप्रीम कोर्ट में बिहार SIR पर सुनवाई पूरी हो चुकी है. इस दौरान याचिकाकर्ता और चुनाव आयोग के वकीलों के बीच जोरदार बहस हुई. हालांकि सुनवाई पूरी हो चुकी है. कुछ ही देर में फैसला आ सकता है. SC के जज ऑर्डर लिख रहे हैं.

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया…
केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बिहार में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा कुल 1,60,813 बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए गए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 2 आपत्तियां ही दर्ज की गई हैं. वहीं, कुछ राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया है कि उनके बीएलए को आपत्तियां दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जा रही है.

इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर मतदाता को नाम जुड़वाने या गलत नाम पर आपत्ति करने का स्वतंत्र अधिकार है. कोर्ट ने बिहार की 12 मान्यता प्राप्त पार्टियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि उनके बीएलए सक्रिय रूप से काम करें और आपत्तियाँ दर्ज कराएं. उम्मीद है कि ये दल अपने बीएलए को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश देंगे.

आपत्ति दर्ज करने के लिए 10 दिन शेष
सुप्रीम कोर्ट में दिए गए एक नोट के अनुसार, यदि सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल सहयोग करें तो उनके 1.6 लाख बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) मिलकर रोज़ाना 16 लाख नामों की जांच कर सकते हैं.

इस गति से, जिन नामों को ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है, उनकी जांच में सिर्फ 4 से 5 दिन लगेंगे. अभी भी आपत्ति दर्ज करने के लिए 10 दिन का समय बचा है, और अब तक 84,305 दावे और आपत्तियाँ सीधे मतदाताओं से प्राप्त हो चुकी हैं.



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