बांका: जिले के शंभूगंज और रजौन प्रखंड में कार्यरत तीन शिक्षकों पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना (विजिलेंस) ने बड़ी कार्रवाई की है. दरअसल शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की जांच के बाद तीनों शिक्षकों का प्रमाण-पत्र फर्जी पाया गया है. जिसके आधार पर संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है.

हाईकोर्ट के आदेश पर जांच
पटना हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिए गए आदेश के आलोक में पूरे बिहार में नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की जांच की जा रही है. इसके लिए जिलावार अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति भी की गई है.

फर्जी शिक्षिका दीपा कुमारी पर कार्रवाई
रजौन प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय कोलहड्डा में पदस्थापित पंचायत शिक्षिका दीपा कुमारी निवासी शास्त्रीनगर (कासिम बाजार थाना, मुंगेर) का नियोजन साल 2006 में हुआ था.
रजौन में केस दर्ज
जांच में दीपा कुमारी का मैट्रिक अंक पत्र कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय से फर्जी पाया गया है. शिक्षिका ने स्वेच्छा से त्यागपत्र भी नहीं दिया था. इसके बाद विजिलेंस ने रजौन थाना को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया था. पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.

शंभूगंज में दो फर्जी शिक्षक उजागर
प्राथमिक विद्यालय जगतापुर में कार्यरत पल्लवी कुमारी (निवासी सोनबर्षा, बिहपुर, भागलपुर) का अंक पत्र उड़ीसा बोर्ड कटक का फर्जी निकला है. हाईकोर्ट से निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी उन्होंने त्यागपत्र नहीं दिया था. इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय मेहरपुर में पदस्थापित निरंजन कुमार (निवासी सोनडीहा, शंभूगंज) का भी प्रमाण-पत्र उड़ीसा बोर्ड से जाली पाया गया. ऐसे में दोनों के खिलाफ शंभूगंज थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.

गिरफ्तारी के लिए छापेमारी
पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के बाद शंभूगंज क्षेत्र के फर्जी शिक्षक पल्लवी कुमारी और निरंजन कुमार की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है. वहीं, रजौन थाना पुलिस भी शिक्षिका दीपा कुमारी पर कानूनी कार्रवाई करने में जुट गई है.

रडार पर हैं एक दर्जन से अधिक फर्जी शिक्षक
गौरतलब है कि इससे पहले भी शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र से दो दर्जन फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई की जा चुकी है. अब फिर कई शिक्षक नकली प्रमाण-पत्र के सहारे सरकारी विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं. जानकारों के अनुसार, जिले में एक दर्जन से अधिक फर्जी शिक्षक अब भी निगरानी विभाग की रडार पर हैं. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो का कहना है कि कार्रवाई देर से जरूर हो रही है, लेकिन कोई भी फर्जी शिक्षक बच नहीं पाएगा. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना का स्पष्ट निर्देश है कि जाली प्रमाण-पत्र पर नियोजित सभी शिक्षकों को बर्खास्त कर उनके विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया जाए.

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
फर्जी शिक्षकों के उजागर होने से एक बार फिर नियोजन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं. ग्रामीण इलाकों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी इसका सीधा असर पड़ा है. स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि वर्षों से फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षक बच्चों का भविष्य किस तरह गढ़ सकते हैं.



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