पटना : बिहार का पहला सिक्स लेन ब्रिज बनकर तैयार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार वासियों को सौगात देने आ रहे हैं. प्रधानमंत्री सिक्स लेन ब्रिज का लोकार्पण करेंगे और उसके बाद आम लोगों के लिए ब्रिज खोल दिया जाएगा. उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने वाला सिमरिया पुल के चालू हो जाने से लाखों लोगों का जनजीवन सुगम होने के आसार हैं.

औंटा-सिमरिया 6 लेन गंगा पुल
पटना से मधेपुरा, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर जाना अब आसान हो जाएगा. 1959 में बना राजेंद्र पुल अब क्षतिग्रस्त हो चुका है और आवागमन आसान नहीं रह गया है. लोगों को राजेंद्र पुल पार करने में घंटा लग जाते थे. अब बिहार वासियों को पटना आने के लिए जद्दोजहद नहीं करना पड़ेगा.

1871 करोड़ की लागत से पुल का हुआ निर्माण
गंगा पर बना भव्य औंटा-सिमरिया 6 लेन पुल का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 अगस्त को करने वाले हैं. यह बिहार का पहला गंगा नदी पर सिक्स लेन पुल है. पुल के निर्माण में लगभग 7 साल का वक्त लगा और 1871 करोड़ रुपए खर्च हुए. खास बात यह है कि इस पुल का निर्माण नरेंद्र मोदी के शासनकाल शुरू हुआ था और नरेंद्र मोदी के शासनकाल में निर्माण कार्य पूरा भी हुआ.

8 किलोमीटर से अधिक लंबा है पुल
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के डीजीएम प्रवीण त्यागी ने बातचीत के दौरान कहा कि सिमरिया पुल उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला एक अहम लिंक माना जाता है. गंगा नदी पर बना यह आधुनिक पुल कुल 8.15 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 1.865 किलोमीटर मुख्य पुल और लगभग 6.285 किलोमीटर अप्रोच रोड शामिल है. परियोजना की कुल लागत लगभग ₹1,871 करोड़ रही है.

उच्च तकनीक से पुल का हुआ निर्माण
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिषेक ने कहा कि पुल को एक्स्ट्रा-डोसेड तकनीक से तैयार किया गया है. यह न केवल मजबूत संरचना है बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग की मिशाल है. सिमरिया धाम जैसे धार्मिक स्थल तक पहुंचना आसान हो जाएगा. वहीं, किसानों और व्यापारियों को भी अपने उत्पादों की ढुलाई में बड़ी सुविधा मिलेगी.

66 साल पहले बना था राजेंद्र पुल
आपको बता दें कि सिमरिया पुल के निर्माण से पहले लोग राजेंद्र पुल के सहारे यात्रा करते थे. 66 साल पहले राजेंद्र पुल का निर्माण 1959 में हुआ था. 1950 में राजेंद्र पुल का निर्माण शुरू हुआ था और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पुल का उद्घाटन किया था. गंगा नदी पर बना यह पुल दक्षिण बिहार के लोगों के लिए लाइफ लाइन की तरह है.

100 KM तक की अतिरिक्त यात्रा से मुक्ति
यह नया छह लेन का पुल पुराने दो लेन के रेल-कम-रोड पुल ‘राजेंद्र सेतु’ के समानांतर बनाया गया है. लगभग सात दशक पुराना राजेंद्र सेतु वर्तमान में मरम्मताधीन है, जिस कारण भारी वाहनों की आवाजाही उस पर प्रतिबंधित है. मजबूरन इन वाहनों को लंबा चक्कर लगाकर गुजरना पड़ता है. नया पुल खुलने के बाद ऐसे वाहनों को 100 किलोमीटर तक की अतिरिक्त यात्रा से मुक्ति मिलेगी.



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