MUZAFFARPUR

मुजफ्फरपुर सबसे ऊपर, किशनगंज दूसरे स्थान पर , पटना थर्ड; निगरानी ने भ्रष्ट लोकसेवकों की सूची जारी की

बिहार : वर्ष 2006 से जारी भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई की जद में सूबे में सबसे अधिक कर्मचारी और अधिकारी मुजफ्फरपुर के ही आए हैं। भ्रष्टचार निरोधक एजेंसियों की पैनी नजर के कारण इन 19 वर्षों में मुजफ्फरपुर के सर्वाधिक 213 कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है।

भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी की सूची में दूसरे नंबर पर किशनगंज है, जहां इन वर्षों में 72 अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। कार्मिक विभाग की मांग पर निगरानी विभाग ने भ्रष्ट कर्मियों अधिकारियों की सूची जारी की है और इन दागी कर्मचारियों व अधिकारियों को किसी तरह का वित्तीय लाभ और प्रोन्नति ने देने की अपील की है।

भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी की सूची में दूसरे नंबर पर किशनगंज है, जहां इन वर्षों में 72 अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। कार्मिक विभाग की मांग पर निगरानी विभाग ने भ्रष्ट कर्मियों अधिकारियों की सूची जारी की है और इन दागी कर्मचारियों व अधिकारियों को किसी तरह का वित्तीय लाभ और प्रोन्नति ने देने की अपील की है।

निगरानी विभाग की संयुक्त सचिव अंजु सिंह की ओर से जारी सूची में मुजफ्फरपुर और किशनगंज के बाद पटना जिला का नंबर आता है। पटना के 24 कर्मचारी और अधिकारी इस अवधि में भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई की जद में आए हैं तो वैशाली को इसमें चौथे स्थान मिला है। वैशाली के 19 और नालंदा के 15 कर्मचारियों-अधिकारियों पर कार्रवाई का डंडा चला है।

इसके अलावा सहरसा में 11, कटिहार में चार, बांका में चार, औरंगाबाद व जमुई में तीन-तीन, सारण में नौ, पश्चिम चंपारण में 10, पूर्वी चंपारण में नौ, दरभंगा में नौ, बक्सर में तीन, मुंगेर में दो, भोजपुर में नौ, गोपालगंज में आठ, समस्तीपुर में 14, नवादा में 11, पूर्णिया में पांच, सीवान में चार, कैमूर में तीन, नालंदा में 15, भागलपुर में सात, खगड़िया में पांच, सीतामढ़ी में छह, गयाजी में आठ, बेगूसराय में छह, मधुबनी में पांच, रोहतास में तीन, मधेपुरा में पांच, अररिया में दो, लखीसराय में दो, जहानाबाद में पांच, अरवल में एक व शिवहर में दो कर्मचारी व अधिकारी पर भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई की गई है।

पंचायत सचिव सबसे अधिक भ्रष्टाचार में पाए गए लिप्त

मुजफ्फरपुर में भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई की जद में सबसे अधिक पंचायत सचिव आए हैं। कार्रवाई की जद में आने वाले अधिकारियों में कृषि विभाग के तत्कालीन संयुक्त निदेशक भानू राम, तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी जेपी ओझा व रामानंद प्रसाद, पशु चिकित्सक डॉ. मदन कुमार व डॉ. सुभाष चंद्र चौधरी, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के क्लर्क दीनबंधु सिंह, भवन निर्माण के तत्कालीन सहायक अभियंता विनोद कुमार झा,

कार्यपालक अभियंता बेचन झा व मदन मोहन राय, अधीक्षण अभियंता सत्यनारायण महतो, कॉपरेटिव अफसर ध्रूव कुमार, प्राचार्य नवल किशोर सिंह, कॉलेज इंस्पेक्टर राजेंद्र प्रसाद महतो, बीईओ हरदेव राय व इंदिरा देवी, बिजली विभाग के अभियंता अजीत कुमार, आपूर्ति निरीक्षक देवेंद्र सिन्हा, बीडीओ महर्षि राम, वन विभाग के रेंज अफसर ददन कुमार, बीडीओ अहमद महमूद व प्रदीप कुमार, सीओ प्रेम प्रकाश शर्मा, सीओ मनोज राम, तत्कालीन एसएसपी विवेक कुमार के नाम भी शामिल हैं।

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