MUZAFFARPUR

बिहार चुनाव से पहले EC का बड़ा फैसला, खत्म हो जाएंगी 345 राजनीतिक पार्टियां!

पटना: भारत निर्वाचन आयोग वैसे राजनीतिक दलों की मान्यता खत्म कर रही है, जिन्होंने 2019 के बाद अब तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है. देशभर में ऐसे 345 राजनीतिक दल हैं, जिनका ना कोई पार्टी कार्यालय है और जिन्होंने 2019 के बाद कोई चुनाव भी नहीं लड़ा है.

इसकी जानकारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार ने सोशल मीडिया के माध्यम से दिया है. बिहार में ऐसी कितनी पार्टी है, उसे चिह्नित किया जा रहा है.

345 राजनीतिक दलों पर संकट

भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की अध्यक्षता में 345 ऐसे रजिस्टर्ड गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को डीलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन्होंने वर्ष 2019 से अब तक किसी भी प्रकार के चुनाव में भाग नहीं लिया है और जिनके कार्यालय देशभर में कहीं भी भौतिक रूप से नहीं पाए गए हैं. ये 345 दल विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं.

राजनीतिक दल हुए हैं चिह्नित

भारत निर्वाचन आयोग के संज्ञान में यह बात आई है कि वर्तमान में पंजीकृत 2800 से अधिक गैर मान्यता प्राप्त दलों में से कई दल ऐसे हैं, जो राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत रहने की आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं कर रहे हैं.

ऐसे दलों की पहचान के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एक राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया संचालित की गई, जिसके प्रथम चरण में अब तक 345 RUPPS (रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टीज) चिह्नित किए जा चुके हैं.

राजनीतिक दलों को कारण बताओ नोटिस

भारत निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी भी राजनीतिक दल को अनुचित रूप से डीलिस्ट न किया जाए, इसको लेकर संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को ऐसे दलों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. इसके बाद संबंधित सीईओ द्वारा इन दलों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा. किसी भी RUPP को डीलिस्ट करने का अंतिम निर्णय भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ही लिया जाएगा.

दलों को कर में छूट का प्रावधान

देश में राष्ट्रीय राज्य और गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का पंजीकरण, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत किया जाता है. इस प्रावधान के अंतर्गत, एक बार पंजीकृत हो जाने पर राजनीतिक दल को कर में छूट समेत अन्य कई सुविधाएं प्राप्त होती हैं.

निष्क्रिय राजनीतिक दलों पर कार्रवाई

यह संपूर्ण प्रक्रिया उन राजनीतिक दलों की पहचान और डीलिस्टिंग के उद्देश्य से की जा रही है, जिन्होंने 2019 के बाद लोकसभा, राज्य विधानसभा या उपचुनावों में भाग नहीं लिया है और जिनका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं पाया गया.

पहले चरण में 345 ऐसे दलों की पहचान की गई है. यह अभियान राजनीतिक व्यवस्था को पारदर्शी एवं स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से आगे भी जारी रहेगा.

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