शिवहर जिले में पांच साल के लंबे अंतराल के बाद निगरानी विभाग की टीम ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला भू-अर्जन कार्यालय के लिपिक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

यह कार्रवाई समाहरणालय परिसर में की गई, जहां लिपिक विजय कुमार श्रीवास्तव को 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। इस कार्रवाई के बाद कार्यालय परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया और अधिकारी व कर्मचारी सकते में आ गए।

निगरानी विभाग के डीएसपी सुजीत कुमार सागर ने बताया कि शहर के बभनटोली गांव निवासी पप्पू कुमार तिवारी ने विभाग में लिखित शिकायत की थी, जिसमें कहा गया था कि रेलवे द्वारा अधिग्रहित भूमि के मुआवजे की फाइल पास कराने के एवज में भू-अर्जन कार्यालय के कर्मचारी द्वारा 70 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत की जांच के बाद विभाग ने 17 जून को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी।

इसके बाद बुधवार की सुबह जैसे ही कार्यालय खुला, निगरानी विभाग की टीम ने पहले से ही वहां जाल बिछा दिया। शिकायतकर्ता जैसे ही तय राशि लेकर पहुंचा और लिपिक ने पैसे लिए, टीम ने तत्काल उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।

डीएसपी सागर ने कहा कि इतनी बड़ी रकम की रिश्वत केवल एक लिपिक के स्तर पर ली जा रही हो, यह मानना मुश्किल है। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हो रहा है कि इस घोटाले में कनिष्ठ से लेकर वरिष्ठ स्तर तक के अन्य अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

गिरफ्तार लिपिक से जिला अतिथि गृह में कई घंटे तक पूछताछ की गई, जिसमें कई नाम सामने आए हैं। डीएसपी ने स्पष्ट किया कि अब आगे अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।

बाताया जा रहा है कि बापूधाम शिवहर से होकर गुजरने वाली नई रेलवे लाइन परियोजना के लिए शहर सहित आसपास के क्षेत्रों की भूमि अधिग्रहित की गई है। अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब मुआवजे का भुगतान किया जा रहा है।

पप्पू तिवारी की 25 डिसमिल जमीन अधिग्रहित की गई थी, जिसकी मुआवजा राशि करीब 35 लाख रुपये निर्धारित थी।

इस भुगतान को पास कराने के लिए लिपिक द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी। कई चक्कर लगाने और थक-हारने के बाद उन्होंने निगरानी विभाग में शिकायत की थी।





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