बिहार में बाढ़ और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में इस विषय पर एक समीक्षा बैठक की, जिसमें जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव ने अब तक किए गए इंतजामों की विस्तार से जानकारी दी।

विभाग की ओर से बाढ़ पूर्व जो काम किए गए हैं, वे यह दिखाते हैं कि सरकार किसी भी आपदा से निपटने को पूरी तरह सतर्क और तैयार है।

बाढ़ से पहले कराए गए कटाव रोधी और सुरक्षा कार्य
राज्य के भीतर बहने वाली प्रमुख नदियों जैसे गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला बलान और महानंदा के किनारे 394 स्थानों पर बाढ़ से पहले ही कटाव रोधी और तटबंध मजबूती के कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

ये काम राज्य योजना, केंद्र सरकार की योजनाओं और आपदा राहत कोष से कुल 1310 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए हैं।

तटबंधों की चौकसी और निगरानी का इंतजाम
राज्य में बाढ़ की स्थिति के दौरान तटबंधों पर खास निगरानी रखी जाएगी। कुल 3808 किलोमीटर लंबे तटबंध पर हर एक किलोमीटर पर एक कर्मचारी की तैनाती होगी, जो लगातार हालात पर नजर रखेगा।

इसके अलावा तटबंध पर निगरानी करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अस्थायी आवास, शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था की गई है।

नदियों पर बने बराज से पानी के बहाव की लगातार निगरानी की जाएगी और अगर जलस्तर अचानक बढ़ता है, तो जिला प्रशासन को तुरंत सूचना दी जाएगी।

तकनीकी विशेषज्ञों की टीम करेगी मदद
बाढ़ के समय तटबंधों और संवेदनशील जगहों की सुरक्षा को लेकर विभाग ने एक तकनीकी टीम बनाई है।

इसमें अनुभवी और रिटायर इंजीनियरों को शामिल किया गया है जो ज़रूरत पड़ने पर स्थानीय इंजीनियरों को सलाह देंगे और मुश्किल हालात में उनका मार्गदर्शन करेंगे।




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