नालंदा: बिहार विधानसभा चुनाव में भले ही अभी 4-5 महीने का वक्त हो लेकिन सूबे की सियासत गरमायी हुई है. एनडीए सरकार पर हमलावर रहने वाले जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर आज अपने हजारों समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गांव कल्याण बिगहा पहुंचे.

हालांकि प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने के कारण उनके समर्थकों को बाहर ही रोक दिया गया. इसको लेकर काफी देर तक पीके और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तीखी बहसबाजी भी देखने को मिली.

कल्याण बिगहा पहुंचे प्रशांत किशोर
जन सुराज नेता प्रशांत किशोर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैतृक गांव में जाने की कोशिश के दौरान प्रशासनिक अवरोधों का सामना करना पड़ा. वह सीएम के गांव कल्याण बिगहा में दलित परिवारों की स्थिति का जायजा लेने जा रहे थे, जिन्हें पुलिस बल ने रोक दिया. हालांकि बाद में प्रशासन की अनुमति के बाद वह अपने तीन साथियों के साथ गांव के अंदर दाखिल हुए.

पीके समेत 4 लोग गांव के अंदर गए: पीके ‘बदलाव का हस्ताक्षर’ अभियान की शुरुआत करने के लिए अपने तीन नेताओं के साथ कल्याण बिगहा गए.

वे कथित तौर पर सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का लाभ उन दलित अति पिछड़ा समाज के लोगों को मिल रहा है कि नहीं उसका सर्वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैतृक गांव कल्याण बिगहा से करने जा रहे थे. लेकिन न जा पाए हैं.

पुलिस की ओर से रोके जाने के सवाल पर प्रशांत किशोर ने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि आप रुक जाइए. आपके सामने चार लोग जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारी जहां तक जानकारी है गांव में धारा 144 लागू नहीं है. देश में लोकतंत्र है. किसी गांव में जाने के लिए और किसी से मिलने के लिए तो कोई रोक नहीं है.

बिना परमिशन नहीं मिलेगी एंट्री
नीतीश कुमार के गांव में भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है. हर एक व्यक्ति से पूछताछ के बाद ही गांव में एंट्री दी जा रही है.

यहां तक कि गांव के लोगो को भी रोक कर पूछताछ के बाद ही जाने दिया जा रहा है.

मौके पर मौजूद सदर एसडीओ वैभव नितिन काजले ने कहा कि जन सुराज पार्टी को गांव के अंदर कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं मिली है.

ऐसे में बिना परमिशन किसी को अंदर जाने नहीं दिया जाएगा.




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