मुजफ्फरपुर: हुसैनी समर्थन 72 द्वारा आयोजित एक प्रभावशाली और भावनात्मक कैंडल मार्च में देशवासियों ने आतंकवाद और यज़ीदी मुसलमान आतंकवादियों के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की।

यह मार्च बनारस बैंक चौक से शुरू होकर सरैयागंज टॉवर तक निकाला गया, जिसमें आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और आतंकवाद के खिलाफ आक्रोश जताया।

यह मार्च देश में लगातार हो रहे आतंकी हमलों और मासूमों के खून से सनी ज़मीन पर इंसाफ़ की मांग का प्रतीक बना। प्रतिभागियों ने मोमबत्तियाँ जलाकर, नारे लगाकर और तख्तियाँ लेकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग की।

“अब बस बहुत हो चुका!”
इस मार्च में शामिल लोगों ने *पहलगाम* आतंकी हमले और उस पर यज़ीदी सोच रखने वाले मुसलमान आतंकवादियों की प्रतिक्रिया पर खुलकर गुस्सा जताया। उन्होंने साफ कहा कि ये लोग मुसलमान नहीं हैं, ये सिर्फ नाम के मुसलमान हैं, जिनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं, बल्कि ये आतंकवाद के पुजारियों की औलाद हैं।

मार्च में बार-बार यज़ीद का जिक्र किया गया, जिसे इस्लाम का पहला आतंकी करार देते हुए कहा गया।
“कर्बला से लेकर आज तक, यज़ीदियत जिंदा है और हम हुसैनियत के रास्ते पर चलकर इसका खात्मा करेंगे!”

आतंकवाद को जड़ से खत्म करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से यह सख्त मांग की कि अब आतंकवाद के खिलाफ केवल निंदा नहीं, कार्रवाई हो।

पाकिस्तान के साथ-साथ देश के अंदर पल रहे यज़ीदी मानसिकता वाले आतंकी समर्थकों पर भी सख्त कानून लागू कर कड़ी सजा दी जाए।

“अगर अब भी हम चुप रहे तो हर गली में कर्बला दोहराई जाएगी।”
हुसैनी समर्थन 72 ने सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक युद्ध जरूरी है। देश को हुसैनी हौसले की जरूरत है, और आतंकवादियों को उनके अंजाम तक पहुंचाना अब समय की पुकार है।




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