बिहार का बांका जिला जिसे कभी शिक्षा के पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, अब शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार की ओर बढ़ रहा है। यह पहली बार है जब जिले के 1169 प्राथमिक विद्यालयों को स्थायी प्रधान शिक्षक (Head Teachers) मिल रहे हैं।

इन विद्यालयों में स्थापना से अब तक कोई प्रधानाध्यापक पद स्वीकृत नहीं था।स्कूलों का संचालन प्रभाराधीन शिक्षकों के माध्यम से किया जा रहा था।इससे प्रशासनिक अनुशासन, जवाबदेही और निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होती थी।

BPSC के जरिए 765 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से 565 शिक्षक बांका जिले से ही चयनित हुए, जो पहले से कार्यरत थे।200 शिक्षक अन्य जिलों से बांका में भेजे गए हैं, ताकि सभी पद भरे जा सकें।सेवा में कार्यरत शिक्षकों को BPSC द्वारा ली गई परीक्षा में भाग लेना था। जो शिक्षक सफल हुए, उन्हें प्रधान शिक्षक के रूप में पदोन्नति मिली।

स्कूलों का आवंटन कैसे होगा?
विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी माध्यम से की जा रही है।शिक्षकों से तीन पसंदीदा ब्लॉक का विकल्प मांगा गया।12 अप्रैल तक ऑनलाइन विकल्प भर लिए गए।अब पटना मुख्यालय से कंप्यूटर द्वारा स्कूल आवंटित किए जाएंगे, जिससे भेदभाव और सिफारिश से बचा जा सके।

शिक्षा की गुणवत्ता में क्या होगा बदलाव?
स्थायी प्रधान शिक्षक मिलने से शिक्षा की गुणवत्ता में बदलाव देखने को मिलेंगे। स्कूलों में प्रशासनिक स्थायित्व आएगा।

शिक्षक टीम के भीतर लीड करने और मार्गदर्शन करने में मदद मिलेगी। बच्चों का एजुकेशन क्वालिटी और अनुशासन बेहतर होगा। योजनाओं का क्रियान्वयन और सरकारी रिपोर्टिंग सुव्यवस्थित होगी।





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