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कुदरत का कहर: आग के तांडव में 15 परिवारों के आशियाने और अरमान जलकर खाक

वैशाली : बिहार के वैशाली जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ बिदुपुर थाना क्षेत्र के मोहनपुर गांव में भीषण आग लगने से भारी तबाही हुई है। देर शाम लगी इस भयंकर आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और कई गरीब परिवारों के सिर से छत छीन ली। इस घटना के बाद से पूरे गांव में कोहराम मचा हुआ है और प्रभावित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।

खाना बनाने के दौरान भड़की आग, 15 घर हुए जमींदोज

मिली जानकारी के अनुसार, आग लगने की शुरुआत एक घर में खाना बनाने के दौरान हुई। तेज हवाओं के कारण चिंगारी ने कुछ ही मिनटों में आसपास के घरों को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीण जब तक कुछ समझ पाते या आग बुझाने का प्रयास करते, तब तक लपटें इतनी तेज हो गईं कि एक के बाद एक करीब 15 घर धू-धू कर जलने लगे। आग की भयावहता देख गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

50 लाख से अधिक की संपत्ति स्वाहा, मेहनत की कमाई बनी राख

स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सामान निकालने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटों के सामने उनकी एक न चली। देखते ही देखते लोगों की वर्षों की गाढ़ी कमाई और घर का सारा कीमती सामान राख के ढेर में बदल गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस अग्निकांड में 50 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है। कई परिवारों के पास अब न तो पहनने को कपड़े बचे हैं और न ही दो वक्त के खाने का सामान।

दमकल की 5 गाड़ियों ने पाया आग पर काबू

घटना की गंभीरता को देखते हुए बिदुपुर थाना पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई। मौके पर दमकल की 5 गाड़ियाँ पहुँचीं। दमकल कर्मियों और ग्रामीणों की घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका। बिदुपुर थानाध्यक्ष रवि प्रकाश ने बताया कि पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला, जिससे आग को और अधिक फैलने से रोका जा सका, हालांकि तब तक 15 घर पूरी तरह नष्ट हो चुके थे।

प्रशासन ने शुरू किया नुकसान का आकलन

हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। राजस्व अधिकारियों द्वारा अग्निकांड से हुए नुकसान का सटीक आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जा रही है ताकि उन्हें सरकारी प्रावधानों के अनुसार जल्द से जल्द राहत राशि और सहायता उपलब्ध कराई जा सके। फिलहाल, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय लोग भी पीड़ित परिवारों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।

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