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भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा अलर्ट: डीआईजी और एसपी ने किया चेक पोस्टों का औचक निरीक्षण

भारत-नेपाल की खुली सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए प्रशासन ने सक्रियता बढ़ा दी है। मंगलवार को कोशी क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) और सुपौल के पुलिस अधीक्षक (SP) शरथ आर एस ने सीमावर्ती इलाकों का दौरा कर सुरक्षा इंतजामों की गहन समीक्षा की। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगाना और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी को परखना था।

चेक पोस्टों पर सतर्कता का जायजा

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न चेक पोस्टों पर तैनात पुलिस बल की कार्यप्रणाली को बारीकी से देखा। डीआईजी ने स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात जवानों के रजिस्टर, हाजिरी और उनके पास मौजूद सुरक्षा उपकरणों की जांच की। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि सीमा से गुजरने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति और वाहन की सघन तलाशी ली जाए ताकि अवैध घुसपैठ को रोका जा सके।

अवैध गतिविधियों के खिलाफ कड़े निर्देश

सीमा पर होने वाली तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए पुलिस अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है। एसपी शरथ आर एस ने स्थानीय पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे गुप्तचर तंत्र को सक्रिय करें। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित सामानों की आवाजाही और असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखना अनिवार्य है। अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीणों से भी अपील की कि यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

नेपाल पुलिस के साथ समन्वय बैठक

सीमा सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए भारत और नेपाल की पुलिस के बीच एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने सूचनाओं के आदान-प्रदान (Information Sharing) पर जोर दिया। तय किया गया कि भविष्य में दोनों देशों की पुलिस संयुक्त गश्त (Joint Patrolling) करेगी, जिससे अपराधियों के लिए सीमा पार कर भागना नामुमकिन हो जाए। यह आपसी तालमेल सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

शांति और कानून-व्यवस्था प्राथमिकता

अंत में, अधिकारियों ने दोहराया कि भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। नियमित अंतराल पर ऐसे निरीक्षणों से न केवल पुलिस बल की सतर्कता बनी रहती है, बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा का भाव भी जागृत होता है। डीआईजी ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे औचक निरीक्षण जारी रहेंगे ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून का राज बना रहे और किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते टाला जा सके।

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