MUZAFFARPUR

सम्राट चौधरी ने ‘काला पानी’ जैसी हाई सिक्योरिटी जेल की जगह बताई, आतंकी और दुर्दांत अपराधी कैद होंगे

बिहार : बिहार सरकार ‘काला पानी’ जैसी नई हाई सिक्योरिटी जेल बनाने जा रही है। इसमें आतंकियों और दुर्दांत अपराधियों को कैद रखा जाएगा। इस जेल की जगह फाइनल कर दी गई है। राज्य के डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने ऐलान किया कि इसका निर्माण कैमूर जिले में स्थित अधौरा पहाड़ पर किया जाएगा। इस जेल में बंद खूंखार अपराधी बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग कर दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को समृद्धि यात्रा के तहत कैमूर जिले के दौरे पर पहुंचे। इस दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। यहां आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सम्राट ने कहा कि कैमूर को जंगल और पहाड़ वाला इलाका माना जाता है। पिछले साल जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रगति यात्रा पर आए थे, तब उन्होंने उस पहाड़ पर डिग्री कॉलेज खोलने का ऐलान किया था।

उन्होंने कहा कि अब नीतीश सरकार ने तय किया है कि कैमूर के अधौरा पहाड़ पर हाई सिक्योरिटी जेल बनाई जाएगी। सबसे खूंखार आतंकवादी होंगे, उन्हें यहां बंद किया जाएगा। पहाड़ी पर इस तरह की जेल बनाने की घोषणा सम्राट ने ही पिछले दिनों बिहार विधानमंडल के बजट सत्र में की थी। हालांकि, उस समय यह नहीं बताया गया था कि यह जेल कहां बनाई जाएगी। अब इसकी जगह फाइनल कर दी गई है।

कैसी होगी हाई सिक्योरिटी जेल

सम्राट चौधरी ने पिछले महीने सदन में कहा था कि नई हाई सिक्योरिटी जेल में खूंखार अपराधियों को रखा जाएगा। इसे ऐसी पहाड़ी पर बनाया जाएगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं आएगा और इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं होगी। इस जेल तक आने-जाने का बस एक ही रास्ता होगा, उस पर भी कड़ा पहरा होगा।

गृह मंत्री ने बताया था कि इस जेल में बाहर से किसी भी व्यक्ति को अंदर आने की अनुमति नहीं होगी। इसमें कैद अपराधी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए रहेंगे। यहां से ना तो कोई शख्स बाहर जा पाएगा और ना ही अंदर आ पाएगा। जेल के अंदर से आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले गैंगस्टर और माफिया को भी यहां रखा जाएगा।

काला पानी जैसी होगी नई जेल?

अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में स्थित सेलुलर जेल को काला पानी जेल कहा जाता है। अंग्रेजों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को इसमें कैद रखा जाता था और उन्हें बहुत कठोर यातनाएं दी जाती थीं। यहां कैद लोग बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग हो जाते थे। उन्हें काल कोठरियों में बंद रखा जाता था। कोल्हू से तेल निकालने जैसे कठिन काम कराए जाते थे। इसी वजह से इसे काला पानी की सजा कहा जाता था।

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