बिहार: बिहार में सरकारी भूमि के संरक्षण और सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक सख्ती काफी तेज हो गई है । माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित हालिया आदेश के आलोक में बिहार सरकार ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने का त्वरित निर्देश दिया है । सरकार की प्राथमिकता अब अंचलवार सरकारी भूमि को सुरक्षित कर एक विशाल ‘लैंड बैंक’ का निर्माण करना है ।

कैडेस्ट्रल सर्वे की जमीन होगी मुक्त
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव श्री सीके अनिल ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज ऐसी सरकारी भूमि, जिसकी विधिसम्मत बंदोबस्ती नहीं हुई है और वह निजी व्यक्तियों के कब्जे में है, उसे प्राथमिकता के आधार पर मुक्त कराया जाए । सरकार ने साफ किया है कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी ।

माननीय उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकारी भूमि राज्य की अमूल्य संपत्ति है । उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न तो स्वीकार्य है और न ही सहनीय । प्रशासन अब ‘शून्य सहिष्णुता’ (Zero Tolerance) की नीति के साथ अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करेगा । अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे वाद दायर कर रिकवरी की प्रक्रिया भी सुनिश्चित करें ।

विकास की आधारशिला बनेगा ‘लैंड बैंक’
सरकार की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य राज्य में औद्योगिकीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करना है । उपमुख्यमंत्री के अनुसार, सुरक्षित की गई भूमि का उपयोग लैंड बैंक के रूप में किया जाएगा, जिससे आधारभूत संरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति मिलेगी । यह अभियान केवल भूमि मुक्त कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के विकास की आधारशिला को मजबूत करने का एक प्रयास है ।

सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी का हवाला
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में ‘विनोद गाँधी बनाम डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, मदुरै’ मामले में अधिकारियों की चूक और लापरवाही को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी । इसी के मद्देनजर राज्य सरकार ने पिछले दो माह के भीतर सरकारी भूमि की सुरक्षा को लेकर कई परिपत्र जारी किए हैं । अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी चूक के कारण राज्य के हितों को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा ।



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