पटना: पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा को एक बार फिर से धमकी मिली है. उपेंद्र कुशवाहा को इस बार मैसेज भेज कर धमकी दी गई है. इस पर पार्टी के नेता आक्रोशित हैं और डीजीपी से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. उपेंद्र कुशवाहा को पहले भी धमकी मिल चुकी है और उस मामले में पार्टी के नेता ही शामिल थे.

उपेंद्र कुशवाहा को फिर मिली धमकी
पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली है. जिसकी जानकारी उन्होंने खुद मंगलवार को सोशल मीडिया X पर साझा की. धमकी भरे संदेशों में गंभीर भाषा का इस्तेमाल करते हुए 15 जुलाई तक कुछ बड़ा होने की चेतावनी दी गई है. कुशवाहा ने इसे न केवल अपनी सुरक्षा, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है.

धमकी में क्या कहा गया
उपेंद्र कुशवाहा ने धमकी भरे मैसेज का स्क्रीनशॉट भी साझा किया है, जिसमें कहा गया है, राजनीति मत करो, नहीं तो सही नहीं होगा. हम छोड़ने वालों में से नहीं हैं. आपको पता चल जाएगा 15 तारीख को. भाई के खर्चे से पूरा बिहार हिला देंगे.

पहले सिवान से जुड़ा था कनेक्शन
20 जून को भी उपेंद्र कुशवाहा को जान से मारने की धमकी मिली थी. हैरानी की बात यह रही कि पुलिस जांच में आरोपी उन्हीं की पार्टी का कार्यकर्ता राकेश कुमार निकला, जो सीवान के दरौली का रहने वाला है. उसने पुलिस को बताया कि वह उपेंद्र कुशवाहा की एनडीए से जुड़ी गतिविधियों से नाराज था और इसी वजह से उसने धमकी दी थी.

डीजीपी से कार्रवाई की मांग
उपेंद्र कुशवाहा ने जहां पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की है तो वहीं पार्टी प्रवक्ता राम पुकार सिंह ने कहा है कि हमारे नेता इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं. पार्टी प्रवक्ता ने डीजीपी से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है.

हमेशा चर्चा में बने रहते हैं कुशवाहा
बिहार की राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा पिछले तीन दशक से सक्रिय हैं और हमेशा किसी न किसी कारण से चर्चा में बने रहते हैं. कभी नीतीश कुमार के काफी नजदीकी भी रहे. कई बार अपनी नई पार्टी बन चुके हैं तो कई दल में भी रहे हैं. कभी एनडीए के साथ रहे हैं तो कभी महागठबंधन के साथ.2014 में एनडीए के साथ लोकसभा का चुनाव लड़े थे और केंद्र में मंत्री भी बने थे, लेकिन 2019 में महागठबंधन के साथ चुनाव लड़े और एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई.

2020 में तीसरा मोर्चा
बनाकर चुनाव लड़े थे और पार्टी का खाता तक नहीं खुला . 2024 लोकसभा चुनाव में फिर से एनडीए के साथ हो गए लेकिन काराकाट से खुद चुनाव जीत नहीं पाए. फिलहाल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और एनडीए ने उन्हें राज्यसभा में सांसद भी बनाया है. विधानसभा चुनाव एनडीए के साथ लड़ने वाले हैं लेकिन अपने बयान को लेकर चर्चा में बने रहते हैं. फिलहाल मिल रही धमकियों को लेकर चर्चा में है.





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