7 साल बाद मछुआरा आयोग का गठन
वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़े कई आयोगों को अचानक पुनर्जीवित किया जा रहा है. मसलन 2018 में भंग किए गए मछुआरा आयोग का गठन सात साल बाद फिर से किया गया है, लेकिन आयोग के पास न तो कार्यालय है और न ही नियुक्त सदस्यों को कोई सुविधा मिल पाई है. यही हाल लंबे अरसे बाद बने उद्यमी एवं व्यावसायिक आयोग का भी है.

पुनाई चक में कार्यालय अलॉट
फिलहाल मछुआरा आयोग और उद्यमी एवं व्यवसायिक आयोग के पास कार्यालय नहीं है उद्यमी एवं व्यावसायिक आयोग के सदस्यों का कहना है कि पाटलिपुत्र में कार्यालय देने की बात हो रही है तो ही मछुआरा आयोग के सदस्यों का कहना है कि पुनाई चक में कार्यालय अलॉट करने की बात कही जा रही है.

उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग भी सुविधा विहीन
उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद निराला का कहना है कि अभी आयोग नया है, इसलिए ना तो कार्यालय मिला है और न ही कोई अन्य सुविधा. कहा जा रहा है कि सम्मान के साथ सभी सुविधाएं जल्द मुहैया कराई जाएंगी.

आयोग-बोर्ड पर सियासत तेज
बिहार में आयोग और बोर्ड के गठन को लेकर जहां सत्ता पक्ष इसे सामाजिक संतुलन और जनहित का फैसला बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर सियासी इनाम देने की प्रक्रिया करार दिया है. आरोप है कि कई आयोगों में जदयू और एनडीए नेताओं के रिश्तेदारों को जगह दी गई है. विपक्ष ने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया है कि नीतीश सरकार ने आयोगों को ‘जीजा-दामाद बोर्ड’ में बदल दिया है.

जल्द जारी होगी अधिसूचना
बिहार सरकार ने अब युवा आयोग का गठन करने का फैसला ले लिया है जल्द ही इसकी भी अधिसूचना जारी हो जाएगी युवा आयोग भी नया है. ऐसे में इसके लिए भी नया कार्यालय और अन्य सुविधाएं सदस्यों को मुहैया करना होगा. बिहार विधानसभा चुनाव में 3 महीना का समय रह गया है.
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