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बिहार फतह के लिए राहुल गांधी की टीम तैयार, ‘स्पेशल 58’ का ऐलान, 5 महिलाओं को भी जगह

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भले ही अभी तक महागठबंधन में सीट समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लगी हो लेकिन राहुल गांधी ने जीत के लिए अपनी रणनीतियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में कांग्रेस ने बिहार के लिए 58 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है. इन पर्यवेक्षकों को विधानसभा के हिसाब से प्रतिनियुक्ति की जाएगी.

58 नेताओं की स्पेशल टीम गठित

बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने 29 जून को 58 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से जारी कर दिया है. इस पत्र में उन्होंने लिखा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सहमति के बाद इन पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है.

किन नेताओं को मिली जगह?

‘स्पेशल 58’ में अंबा प्रसाद, अनुमा आचार्य, अमरजीत भगत, अजीत भारती, अली मेहंदी, आरिफ मसूद, अजय विद्यार्थी, आलोक चंद्र, भुवनेश्वर बघेल, दीनबंधु बोईपी, दीपक मिश्रा, देवेंद्र निषाद, देवेंद्र सिंह राजपूत, देवेश कश्यप,गर्वित सिंघवी, हर्ष पवार,

हेमंत उगले, इफ्तिखार अहमद,जयकरण वर्मा, जयंत रमोला, किसलय चौहान, कमलेश ओझा,अब्राहम रॉय मणि, मनीष यादव, मनोज गौतम, मनोज यादव, मंटू पांडे मुजफ्फर गुर्जर को जगह दी गई है.

इसके साथ ही नदीम जावेद,नोमान, पंकज उपाध्याय, पीर नासिर इरशाद, प्रेम नारायण सिंह पाल, प्रियव्रत सिंह, जेपी पाल, राहुल राय प्रजापति, राहुल रजवार, राहुल शर्मा, राजबहादुर निषाद, राकेश पासवान, रेखा चंद जैन, शैलेश पांडे, संतोष भार्गव, सेन मिर्जा आलम, शमशेर चंद, शीशपाल खेहरवाला, सीतांशु मौर्य, शिवाकांत तिवारी, शोएब खान ममता देवी, श्वेता सिंह, सीताराम लंबा, सुभाष राजवंशी, तमजीत अहमद, अखिलेश यादव, विनोद चंद्राकर, वीरेंद्र यादव और विवेकानंद पाठक शामिल है.

5 महिला और 10 अल्पसंख्यक भी शामिल

विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने जिन 58 ऑब्जर्वर की नियुक्ति की है, उनमें 5 महिला और 10 अल्पसंख्यक नेताओं को जिम्मेवारी दी गई है. शेष 43 लोगों में सभी वर्गों के लोगों को शामिल कर जातीय संतुलन बैठाने की कोशिश की गई है.

कितनी सीट चाहती है कांग्रेस?

2020 विधानसभा चुनाव के सीट के फार्मूले के तहत ही इस बार भी कांग्रेस 70 सीट चाहती है लेकिन अभी तक इंडिया गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है. इंडिया गठबंधन के घटक दलों की चार बैठकर हो चुकी है लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री के चेहरे पर भी मुहर नहीं लगी है.

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