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बिहार के सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए गुड न्यूज! नीतीश सरकार के इस फैसले से हट जाएगी ये झंझट

बिहार के सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसके तहत पोशाक और साइकिल योजना का लाभ उठाने के लिए अब कक्षा में 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता नहीं रहेगी। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सोमवार को विधान परिषद में यह घोषणा की।

योजना का लाभ

बिहार के सरकारी स्कूलों में हर साल लगभग 1.80 करोड़ छात्रों का नामांकन होता है। अब छात्रों को पोशाक और साइकिल योजना का लाभ उठाने के लिए हाजिरी की सीमा नहीं रहेगी, जिससे अधिक छात्र इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। कक्षा 9 के सभी छात्र-छात्राओं को साइकिल योजना के तहत 3000 रुपये दिए जाते हैं, जबकि कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को पोशाक के लिए सहायता दी जाती है।

दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति

शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए जल्द ही विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 हजार स्कूलों का कंप्यूटराइजेशन कर दिया जाएगा। राज्य में उच्च शिक्षा को भी मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, जिसमें सहायक प्रोफेसरों की बहाली और कॉलेजों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार शामिल हैं।

महिला सशक्तीकरण और साक्षरता दर में सुधार

बिहार में साक्षरता दर तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2000 में राज्य की साक्षरता दर 40 प्रतिशत थी, जो अब 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। महिला साक्षरता दर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो अब 74 प्रतिशत हो गई है। राज्य में 6 लाख से अधिक शिक्षकों में से 44 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो महिला सशक्तीकरण का एक बड़ा उदाहरण है।

पोशाक योजना के तहत राशि

सरकार का लक्ष्य है कि 1 अप्रैल को छात्रों के खातों में पोशाक की राशि भेज दी जाए। कक्षा 1 से 12 तक की सभी छात्राओं और कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को पोशाक की राशि दी जाती है। मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना के तहत कक्षा 1 से 12 तक की छात्राओं को 600 से 1500 रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाती है।

बिहार सरकार की पोशाक और साइकिल योजना

बिहार सरकार पोशाक और साइकिल योजना के लिए 75 प्रतिशत हाजिरी की अनिवार्यता को समाप्त करना छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे अधिक से अधिक छात्र-छात्राएँ इन योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे, जिससे उनकी शैक्षिक यात्रा में सहायता मिलेगी। साथ ही, राज्य में साक्षरता दर और महिला सशक्तीकरण के लिए किए गए प्रयासों ने शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की स्थिति को और मजबूत किया है।

 

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