समस्तीपुर में हसनपुर- सकरी रेल परियोजना के तहत हसनपुर- बिथान रूट पर 11 किलोमीटर रेल लाइन बिछाने का कार्य संपन्न हो गया। रेलवे लाइन के एनआई व सिंगनल का कार्य अंतिम चरण में है। इस खंड के इस्ट्रन सर्किंल के सीआरएस शुवमोय मित्रा 28 मार्च को निरीक्षण करेंगे। माना जा रहा कि निरीक्षण समाप्त होते ही ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। ट्रेनों का परिचालन शुरू होने से इस इलाके के लोगों का करीब 50 सालों का सपना पूरा होगा।
डीआरएम आलोक अग्रवाल ने बताया कि हसनपुर- बिथान के बीच 11 किलोमीटर रेलवे लाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है। सीआरएस ने निरीक्षण की अनुमति दे दी है। 11 किलाेमीटर में रेलवे लाइन बिछाने के बाद सिंगनल व एनआई कार्य गुरुवार को पूरा कर लिया गया है।
उधर, सीआरएस के आने के एक दिन पूर्व प्रिसिंपल चीफ इंजीनियर विद्युत श्री रंजन श्रीवास्तव खंड का निरीक्षण करेंगे। ट्रेन सेवा शुरू होने से इन इलाके में विकास का बयार आएगा। बाढ़ प्रभावित इस इलाके में ट्रेन सेवा शुरू होने से इस इलाके के विकास के द्वार खुलेंगे। यह इलाका जिले का बांढ प्रभावित इलाकों में से एक है। यहां साल से छह महीने लोग पानी से धीरे रहते हैं। जिस समय इस इलाके के लिए नाव ही एक मात्र सहारा बन जाता है। ऐसी स्थिति में रेलवे लाइन लाइफ लाइन बन जाएगी।

सीआरएस के आने के एक दिन पूर्व प्रिसिंपल चीफ इंजीनियर विद्युत श्री रंजन श्रीवास्तव खंड का निरीक्षण करेंगे।
एक नजर में पूरी योजना की स्थिति पर
हसनपुर- सकरी 76 किलोमीटर रेल परियोजना के अधीन हसनपुर- बिथान एक पार्ट है। इस योजना पर दो चारणों में काम चल रहा। इसके लिए अलग-अगल उप मुख्य अभियंता काम कर रहे। पहले चरण में सकरी से कुशेश्वर स्थान के कार्य काे बांटा गया। इस ओर पर सकरी से हरनगर तक रेलवे लाइन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। ट्रेन हरनगर तक चल भी रही है।
हरनगर से कुशेश्वर स्थान के बीच दरभंगा के तत्कालीन डीएफओ दीगंबर ठाकुर द्वारा दिसंबर 76 किलोमीटर की इस योजना में दस रेलवे स्टेशन का निर्माण होना है। इस योजना के तहत हसनपुर, बिथान, कौराही, विरौल,हरनगर, कुशेश्वरस्थान, नेडली, बेनीपुर, जगदीशपुर व सकरी को स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है।

ट्रेन सेवा शुरू होने से इन इलाके में विकास का बयार आएगा।
इसके तहत सकरी, कुशेश्वस्थान व हसनपुर को जंक्शन के अलावा चार क्रॉसिंग स्टेशन, 45 रेलवे गुमटी व 82 छोटे-बड़े पुलों का निर्माण होगा। योजना के इतिहास पर डालें एक नजर 1951 में योजना के लिये जांच की गई। 1953 में रेलवे बोर्ड ने कहा कि बाढ़ के इलाके में यह संभव नहीं। 1972 में तत्कालीन रेलमंत्री स्व. ललित नारायण मिश्रा ने सर्वे की घोषणा की।
इसी बीच समस्तीपुर स्टेशन पर बम विस्फोट में ललित बाबू की हत्या हो गई। इसके बाद इस योजना की फाइल बंद कर दी गई। 1997 में रेल मंत्री रामविलास पासवान ने इस योजना को मिथिलांचल के विकास के लिये जरूरी बताते हुए पुन: खोली व फंड उपलब्ध कराकर शिलान्यास किया। रामविलास के रेलमंत्री से हटते ही कई वर्षों तक इस योजना को राशि नहीं मिली। लालू प्रसाद के रेल मंत्री बनने पर इस योजना को फंड मिलना शुरू हुआ। चालू वित्तीय वर्ष में 75 करोड़ रुपये मिले हैं जिससे काम को कराया जाएगा।



Leave a Reply