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बिहार में महंगी हो गई बिजली..24.10% की बढ़ोतरी:100 यूनिट पर डेढ़ सौ रुपए ज्यादा देने होंगे

बिहार के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। बिजली की दरों में 24.10% की बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके बाद बिजली 2 रुपए तक प्रति यूनिट महंगी हो जाएगी। अब 100 यूनिट तक बिजली यूज करने वाले कस्टमर को डेढ़ सौ से दो सौ रुपए ज्यादा चुकाने होंगे। फिक्स्ड चार्ज भी दोगुना कर दिया गया है।

100 यूनिट से ज्यादा बिजली का उपयोग करने वाले को 1.67 रुपए प्रति यूनिट ज्यादा देने हाेंगे। इसमें फिक्स्ड चार्ज जोड़ दिया जाए तो बढ़ोतरी प्रति यूनिट 2 रुपए से ज्यादा होगी। अभी तक यह दर 6.95 रुपए प्रति यूनिट थी, जो बढ़कर अब 8.62 रुपए प्रति यूनिट हो जाएगी। हालांकि नई दरें सरकार की तरफ से दी जाने वाली सब्सिडी के आधार पर तय की जाएंगी। अभी सरकार प्रति यूनिट 1.83 रुपए सब्सिडी देती है।

बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने गुरुवार को बिजली दर में बढ़ोतरी की घोषणा की है। बिजली कंपनी ने इसे 40% तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। आयोग ने सुनवाई के बाद 24.1 फीसदी की मंजूरी दी है।

फिक्स्ड चार्ज दोगुना बढ़ाया गया है, जिससे रेट और बढ़ेगा। नई दरें सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी के आधार पर तय होंगी।

फिक्स्ड चार्ज भी डबल
बिजली दर बढ़ोतरी के साथ ही बिल में फिक्स्ड चार्ज में भी बढ़ोतरी की गई है। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि फिक्स्ड चार्ज में दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। अब बिजली दरों के 3 स्लैब की जगह अब दो ही होंगे।

सरकार चाहे तो मिल सकती है थोड़ी राहत
राज्य सरकार सब्सिडी देकर बिजली उपभोक्ताओं को राहत देती है। अभी एक यूनिट पर 1.83 रुपए की सब्सिडी मिलती है। अगर राज्य सरकार इसमें बढ़ोतरी करती है तो बढ़े हुए बिजली बिल से कुछ राहत मिल सकती है।

1 अप्रैल से 31 मार्च 2024 तक यही रेट

यह फैसला 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक लागू रहेगा। बताया गया है कि अब सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी के आधार पर प्रति यूनिट बिजली की दर तय होगी।

इससे पहले मंगलवार को आयोग के अध्यक्ष शिशिर सिन्हा और सदस्य एससी चौरसिया ने बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी, स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर और बिहार ग्रिड कंपनी के प्रस्ताव पर फैसला सुनाया।

आयोग ने पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी को वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1176.62 करोड़ अनुमानित सकल राजस्व की मंजूरी दी है, जबकि मांग 1516.73 करोड़ की थी।

इसी तरह स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर को 12.01 करोड़ की अनुमानित सकल राजस्व की मंजूरी दी है। जबकि मांग 12.02 करोड़ की थी। वहीं, बिहार ग्रिड कंपनी को 219.38 करोड़ अनुमानित सकल राजस्व की मंजूरी दी है, जबकि मांग 403.20 करोड़ की थी।

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