पटना में ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरीके से ऑटोमेटिक बनाने की तैयारी जोरों से चल रही। यह व्यवस्था अप्रैल 2023 से पूरी तरीके से शुरू हो जाएगी। इसके बाद ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों का ऑटोमैटिक चालान कटना शुरू हो जाएगा। दूसरी बात यह कि राजधानी पटना में ऐसे ट्रैफिक लाइट लगाए जाए जा रही जिसमें सेंसर मौजूद है। यह पूरी तरीके से स्मार्ट है और ट्रैफिक लोड के अनुसार ग्रीन और रेड लाइट होता रहेगा।
ट्रैफिक लोड देख सिग्नल खुद होगा रेड-ग्रीन
पूरी तरीके से स्मार्ट और ऑटोमेटिक सिस्टम ट्रैफिक कितना डेंस है इसका अंदाजा आपको ट्रैफिक लाइट में लगे सेंसर से हो जाएगा इस सेंसर का काम यह है कि यह ट्रैफिक लोड के अनुसार ग्रीन और रेड होगा। इस बात की जानकारी पटना ट्रैफिक एडीजी सुधांशु कुमार ने दी। उन्होंने आगे कहा की, यह पूरी तरीके से अप्रैल महीने से शुरू हो जाएगा। उसके बाद लोगों को अनावश्यक अधिक देर तक ट्रैफिक सिग्नल पर रुकना नहीं पड़ेगा। इस अडाप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम की खासियत है कि इसे मैन्युअली भी संचालित किया जा सकता है।
पटना की सड़कों पर लगाए जा रहे 2600 कैमरे
पटना की सड़कों पर इस साल कुल 26 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिससे आने वाले अप्रैल महीने से निगरानी शुरू हो जाएगी। बिना हेलमेट बाइक स्कूटर चलाने, ट्रिपल लोडिंग, बिना सीट बेल्ट लगाए कार चलाने वाले, बिना नंबर की गाड़ियां जैसे ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहनचालकों के सीधे घर पर ई- चालान भेजा जाएगा। यातायात अधिकारी सीसीटीवी से राजधानी में जाम की स्थिति पर भी नजर रखेंगे।
पत्रकार, पुलिस और वकीलों का भी कटेगा चालान
ट्रैफिक एडीजी सुधांशु कुमार ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हम लोगों के द्वारा फेसलेस चालान की सुविधा की शुरुआत जल्द ही की जा रही है, इस स्थिति में अगर आप किसी भी यातायात नियम का उल्लंघन करते हैं, तो आपके मोबाइल पर तुरंत यह सूचना चली जाएगी कि आपने इस नियम का उल्लंघन किया है और इसके लिए आपको इतने रुपए के फाइन का भुगतान करना होगा।
जाम हटाने के लिए भी बनाई जा रही रणनीति
ट्रैफिक एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि अप्रैल महीने से यह सिस्टम शुरू हो जाने पर यातायात संचालन में काफी सहूलियत होगी। उपकरणों की मदद से यातायात नियम तोड़ने वालों पर स्वचालित तरीके से कार्रवाई की जा सकेगी। वहीं, सीसीटीवी कैमरे की मदद से राजधानी की सड़कों पर लगने वाले जाम पर नजर रखी जाएगी। ज्यादा दबाव वाली सड़कों की पहचान के बाद वहां ना लगे, इसके लिए यातायात पुलिस रणनीति बनाएगी।



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