बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद पुलिस की दबिश के बाद धंधेबाज शराब बेचना छोड़कर अब नया कारोबार में अपना पैर पसारना शुरू कर दिया है। धंधेबाजों ने शराब बेचना छोड़कर अब नशे के कारोबार में युवाओं को अपना निशाना बना लिया है। पूर्णिया के युवा तेजी से नशे का शिकार होने लगे है। जिले के युवाओं में नशे का जहर घोला जा रहा है। पुलिस की लाख कोशिश के बाद भी स्मैक के कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों आरोपी युवक की उम्र करीब 20 वर्ष है।
कोड वर्ड से बेचे जाते है स्मैक
स्मैक को कोड वर्ड से बेचा जाता है। इस बात का खुलासा तब हुई जब बीते शनिवार के शाम मरंगा थाना पुलिस ने चोरी के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया। आरोपी ने बताया कि वह स्मैक के नशे का शिकार हो गया है। ठिकाने पर खुलेआम स्मैक बेचा जाता है। एक पुडिया स्मैक की कीमत 100 रुपये है। इसके लिए कोड वर्ड का प्रयोग होता है। स्मैक के जगह सब्जी कहने पर आसानी से स्मैक मिल जाता है। सब्जी स्मैक का कोड वर्ड है। फोन करने पर पहुंच जाता है। दोनों युवक के पास से स्मैक के पुडिया, माचिस, सिगरेट व सिल्वर पेपर भी मिले है।
शिक्षण प्रतिष्ठान निशाने पर
आरोपियों ने बताया कि स्मैक के धंधेबाज खासकर स्कूल, कॉलेज, ट्यूशन सेंटर व बेरोजगार युवकों को अपना निशाना बनाते हैं। शुरुआत में तो फ्रि में दिया जाता है। जब लत स्मैक के लत लग जाते हैं तो फिर कैश लेकर बेचा जाता है। जब खरीदने के लिए पैसे नहीं रहता है तो नशेडी चोरी, छिनतई करने लगते है। यहां तक कि मंदिर की घंटी और दान पेटी पर भी हाथ साफ कर देते हैं। सदर एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार सरोज ने बताया कि स्मैक के लत से ज्यादातर चोरी की घटना हो रही है। पुलिस इस पर लगातार कार्रवाई कर रही है।



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