भाकपा माले की बड़ी रैली पटना के गांधी मैदान में 15 फरवरी को है। इसको लेकर बड़ी तैयारी पटना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में की जा रही है। पटना के बेली रोड पर दूर तक माले के सैकड़ों और पोस्टर दिख रहे हैं।/
1994 की सामाजिक परिवर्तन रैली याद आ रही, इससे ज्यादा लोग जुटाने की तैयारी
आपको बताएं कि पटना के गांधी मैदान में माले की ओर से आयोजित अब तक की सबसे बड़ी रैली 1994 की रैली मानी जाती है। यह रैली ‘ सामाजिक परिवर्तन रैली’ थी। तब कामरेड विनोद मिश्र ने इस रैली को आयोजित करने में बड़ी भूमिका निभायी थी। माले के पुराने नेता केडी यादव बताते हैं कि उस रैली में दो लाख से अधिक लोग आए थे। माले की तैयारी उससे अधिक लोगों को जुटाने की है। इस रैली में राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को कैसे घेरा जाए, गोलबंदी की जाए, इसकी रणनीति बनाना मुद्दा है और साथ ही बिहार के स्थानीय मुद्दे, आंदोलनों से जुड़े लोगों के सवालों को भी ताकत दी जाएगी। बता दें माले के 12 विधायक बिहार में हैं और माले नीतीश-तेजस्वी सरकार को समर्थन दे रही है लेकिन मंत्रिमंडल में शामिल नहीं है, जबकि दो-तीन मंत्री पद माले को सरकार में मिल सकते थे।
38 जिलों से लोग बड़ी संख्या में आ रहे, इन संगठनों की बड़ी भागीदारी होगी
हमने भाकपा माले पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेन्द्र झा से बात की। वे कहते हैं कि कामरेड विनोद मिश्र तब माले के जनरल सेक्रेट्री थे तब ऐतिहासिक रैली पटना के गांधी मैदान में हुई थी।15 फरवरी को होने वाली माले की रैली में बिहार के 38 जिलों से लोग भाग लेने आ रहे हैं। कंपोजिशन वाइज भी इस रैली में काफी विविधता दिखेगी। किस-किस संगठन के लोग इसमें भाग लेने आएंगे? इस सवाल पर धीरेन्द्र झा कहते हैं कि पार्टी संगठन के, खेत मजदूर संगठन के, किसान महासभा, छात्र नौजवान संगठन, महिला संगठन के लोग बड़ी संख्या में भाग लेंगे।
रैली में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में भाग लेंगे। इंसाफ मंच की ओर से इसकी तैयारी हो रही है। अकलियत समाज से अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी इस रैली में आपको दिखेगी। साथ ही साथ प्रेरक संघ जो साक्षर भारत अभियान से जुड़ा है उसके हजारों लोग, रसोईया संघ की हजारों महिलाएं, आशा कार्यकर्ता संघ की हजारों महिलाएं, साथ ही छात्र नौजवानों के वे समूह जो ठेका या नियोजन पर कार्यरत हैं, शिक्षक नियोजन के सवाल पर जो युवा लड़ रहे हैं वे सब इसमें भाग लेंगे।
गरीबों की भागीदारी खूब होगी
वे कहते हैं कि बिहार में लेफ्ट डेमोक्रेटिक के समूह, छोटे संगठन जो अभियान चला रहे हैं वे भी आएंगे। जैसे कि बागमती बचाओ आंदोलन से जुड़े लोग आएंगे। कोसी और कमला नदी के इलाके में अभियान चला रहे लोग आएंगे। दलितों, पिछड़ों, गरीबों को उजाड़ने का अभियान बिहार में चल रहा है। इसके विरोध में माले और अखिल भारतीय खेत मजदूर सभा की ओर से पूरे बिहार में जबर्दस्त आंदोलन चल रहा है। जिन गरीबों को उजाड़ने का नोटिस दिया गया है या बुलडोजर चलाए जा रहे हैं वहां से रैली में बड़ी भागीदारी करने लोग आ रहे हैं।1948 में आजादी के तुरंत बाद दलित गरीबों को बासगीत का पर्चा मिला था, लेकिन आजादी के बाद सरकार की कोई पहल इसको लेकर नहीं है। इसको लेकर हम दबाव बना रहे हैं।
रैली भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय गोलबंदी को दिशा देगी
बिहार में आपकी सरकार है और उसी सरकार को जगाने आप चले हैं? इस सवाल पर धीरेन्द्र झा कहते हैं कि निश्चित रुप से बिहार में महागठबंधन की सरकार है और हमारी पार्टी माले बाहर से सरकार को अपना समर्थन दे रही है। भाजपा के खिलाफ बिहार आंदोलन का केन्द्र बने इसलिए महागठबंधन की सरकार पर भी हमारा दबाव है। जमीन, बिजली, शिक्षा, आवास का सवाल है। इस पर बिहार सरकार पहल करे। इस रैली से भाजपा की तानाशाही और फासीवाद के खिलाफ राष्ट्रीय गोलबंदी होगी। रैली दिशा देगी।



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